April 26, 2026

ज़ंजीरों वाला पेड

छतरपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर गांव बरट में एक पेड़ सैकड़ो वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। दूर-दूर से लोग यहां अपनी मन्नत लेकर आते हैं और पेड़ के नीचे खड़े जंज़ीरों को पकड़कर उन्हें बजाकर अपनी मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर लोग श्रद्धा से यहां लोहे की जंजीर (साँकर) ठोक जाते हैं।

पेड़ में अब तक लाखों की संख्या में लोहे की जंजीर लगा चुके हैं। हजारों की संख्या में जंज़ीरें इस पेड़ के अंदर ही समां गई हैं। लोगों की मानें तो जब यह पेड़ छोटा था तब से लोग इसमें लोहे की मोटी जंजीरें लगाते हुए चले आ रहे हैं। ग्रमीणों का कहना है कि यह लगभग डेढ़ सौ वर्ष से भी पुराना रिवाज है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा हैं।

ग्रामीण और श्रद्धालु बताते हैं कि यहां बच्चे की मन्नत, शादी की मन्नत, वाद-विवाद निपटने की मन्नत, धन-दौलत, सहित अन्य दुनिया भर की परेशानियों को लेकर दूर-दूर से आते हैं। लोग बताते हैं कि ईश्वर के प्रति लोगों की आस्था और मांगा वर पूरा होने पर दूर-दूर से लोग स्वतः खिंचे चले आते हैं।

यह पेड़ कितने साल पुराना है इसका सही अंदाजा लगाना मुश्किल है। बुजुर्गों का कहना है कि हम पीढ़ियों से इसे ऐसा ही होते देखते आ रहे हैं। लोगों की आस्था है कि इस पेड़ में देवता वास करते हैं। इस पेड़ की अपनी एक अलग ही महिमा है। कोई सच्चे मन से यहाँ कुछ मांगता है तो उसकी मनोकामना तय समय में जरूर पूरी होती हैं। यही वजह है कि लोगों द्वार अब तक हज़ारों-लाखों की संख्या में (सैकडों टन) जंज़ीरें चढाई जा चुकी हैं।

यहां बांधी गई ज़ंज़ीर ज़मीन पर गिर जाती है, वह वहीँ समा जाती है। इस तरह अब तक कई टन जंज़ीरें पेड़ के नीचे दफन ही गई हैं। मान्यता है कि अगर कोई ज़ंज़ीर उठा ले जाता है यो उसके साथ अहित हो जाता है। वह माफ़ी मांगता हुआ जंजीर वापिस करने और साथ में नई भी चढ़ाने भागा चला आता है।

Written by XT Correspondent

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