March 13, 2026

अद्भुत है मन से भाव, भाव से सृजन जैसे समुद्र से सीप, सीप से मोती । अचेनत से चेतन, चेतन से अचेतन

डॉ. रीता जैन
(Ph.D प्राणीशास्त्र & मैनेजमेंट,
एम. फिल (लेजर) MBA (HR)
(वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता, लेखिका)
प्राचार्य, चोइथराम कॉलेज, इन्दौर

समुंदर की लहरे जब आपको छूकर जाती है दिल में सुकून और चेहरे पर खुशी बिखेर देती है। ऐसा ही वो अद्भुत पल था जब मैं कोरोना काल में ही कुछ दिन पूर्व विशाखापट्नम यात्रा पर गई. यह शहर वाईजेग के रूप में भी जाना जाता है और तीन पहाड़ियों से घिरा हुआ है। ईस्ट कोस्ट के सबसे रमणीय समुद्र तटो में से एक रामकृष्ण समुद्र तट पर प्रातः 6 बजे मैं समुद्र की लहरो के बीच थी। अपने विषय के लगाव की वजह से मेरी आंखे सीप को खोज रही थी, और साथ ही उस ओएस्टर के अंदर जो मोती बनता है, उसे भी कही पाने की लालसा थी।
समुद्र भी इंसान की तरह अपने लाखो करोडो रहस्य को लिए बैठा है। बस यही सब सोच रही थी कि तेज समुद्र की लहरों ने मुझे छुआ और एक सीप आकर टकराइ , जैसे मैं अपलक इंतजार में ही थी और वो सीप मेरे हाथ में था। उसे लेकर समुद्र के किनारे पर आई, उसे साफ किया बस निहारते ही रह गई। उस ओएस्टर के अंदर 5 असली मोती चिपके हुए थे जिसे धीरे धीरे करके एक-एक को बार निकाला और लगा जैसे खजाना मिल गया हो।

कहते हैं
“समंदर के ऊपर कश्ती भी चलती है, हुनर और होंसला हो तो किस्मत भी बदलती है।”

इन सुंदर और आकर्षक मोतियों को निहारते हुए मुझे जीव की वो पीड़ा याद आ गई जो मैने कभी पढ़ा था कि मोती बनता कैसे है।

पर आपने कभी सोचा कि इतने सुंदर दिखने वाले रंग-बिरंगे मोती जो अनायास ही हमें आकर्षित करते हैं, ये कहां से आते है, ये बनते कैसे है, इसकी क्या प्रक्रिया है, यह जानना, समझना आपके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि मोती एकमात्र ऐसा रत्न है, जिसे एक समुद्री जीव जन्म देता है और वो समुद्री जीव अनेक पीड़ा को अपने अंदर समाकर एक बहुमूल्य रत्न यानी मोती मे बदल देता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि समुद्री जीवों में सीप अकेला ऐसा जीव है जो पानी को साफ रखता है, समुद्री जीवी सीप दुनिया का एकमात्र ऐसा अद्भुत व अद्वितिय प्राणी है, जो शरीर में पहुंचकर कष्ट देने वाले हानिकारक तत्वों को बहुमूल्य रत्न यानी मोती में बदल देता है। यहीं नहीं समुद्री जीव जन्तुओं के जानकर वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि यदि सीप न हो तो पृथ्वी पर एक बूँद भी स्वच्छ व मीठा पानी मिलना मुश्किल है।

आपको जानकर अचरज होगा कि सीप की यह भी विशेषता है कि यह प्रकृति से एक बार का आहार ग्रहण करने के बाद लगभग 96 लीटर पानी को को कीटाणु मुक्त करके शुद्ध कर देता है और इनके पेट मे जो कण, मृतकोशिकाएँ व बाहरी अपशिष्ट बचते है, उन्हे गुणकारी मोतियों में बदल देता है। सीप पानी की गंदगी को दूर करके पानी में नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देता है और ऑक्सीजन की मात्रा आश्चर्यजनक ढंग से बढा देता है। आज कोरोना काल मे जैसा कि आप सब जान गए है कि ऑक्सीजन कितनी क़ीमती है। यहीं नहीं सीप जल को प्रदूषण मुक्त करने के साथ प्रदूषण पैदा करने वाल अवयवो को हमेशा के लिए खत्म कर देता है।

इसलिए सीप की खेती पर्यावरण के अनुकूल खेती के रूप में विकसित हो रही है। समुद्री जीवो में सीप अकेला ऐसा जीव है जो पानी को साफ रखता है। समुद्र की तरह मीठे पानी में भी सीप होते है। पानी की सफाई में इनकी अहम भूमिका सुनिश्चित हो चुकी है। इमसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब एक सीप 96 लीटर पानी साफ कर सकता है तो सीपो की बड़ी संख्या नदी और तालाबों को भी आसानी से साफ कर सकती है।

आप सबके लिए यह जानना भी आवश्यक है कि मोती एकमात्र ऐसा रत्न है जिसे एक
समुद्री जीव जन्म देता है, वरना अन्य सभी रत्न एवं मणियाँ धरती के गर्भ से खनिजों के रूप में निकाली जाती है। इसलिए पृथ्वी को “रत्नगर्भा” कहा गया है। प्राचीन मान्यता थी की स्वाती नक्षत्र में वर्षा की एक बूंद जो सीप के गिरती है, वह कालान्तर में मोती का रूप ग्रहण कर लेती है। मोती में 90 प्रतिशत कैलशियम कार्बोनेट होता है

यह जानना भी आपके लिए रूचिकर होगा कि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान
अण्डमान-निकोबार की राजा की रोल्युलर जेल काला-पानी की राजा के लिए कुख्यात थी, लेकिन
अब यहाँ कुछ विशिष्ट वैज्ञानिकों की सूझबूझ से मोती सृजन की असीम उम्मीदें पनपती दिखाई दे
रही है। यह भू-भाग, दुनिया में नायाब को मोती की उपलब्धता के रूप में विकसित हो रहा है।

अण्डमान विविध समुद्री सम्पदा के मामले में बेहद समृद्ध है।

बेशकीमती मोतियों को बनाने वाली सीपों की प्रजातियां यहाँ मौजूद है, वे दुनिया के अन्य समुद्री क्षेत्रों में नहीं मिलती है। अण्डमान का समुद्री द्वीप मोतियों के लिए इतने उत्पादक क्षेत्र है कि यहां काले और स्वर्ण मोतियों का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जा सकता है। क्योंकि यहां का जलवायु और विलक्षण प्रजाति की सीप मोती उत्पादन में सहायक है।

इसीलिए यहां मोती का सृजन 6 से 8 महीने के भीतर हो जाता है। जबकि अन्य देशो में जलवायु की भिन्नता के चलते मोती को सम्पूर्ण आकार लेने में एक से तीन साल तक का समय लगता है।

सीपो की विशेष प्रजाति से प्रयोगशाला • नियंत्रित वातावरण में ऐसे मोतियों का समर्थन किया गया है, जिसमें उनके माइक्रो न्यूट्रिएंट्स मौजूद है, जिसकी मानव शरीर में मौजूदगी कैंसर जैसी व्याधि से बचा सकती है।

कहते हैं कि आदमी कि किस्मत का किसी को नहीं पता ऐसे तमाम वाकये आपने देखे होगे जिसमें आदमी कुछ ही पलो में फर्श से अर्श और अर्श से फर्श पर चला जाता है। ऐसी ही एक घटना कुछ दिनों पूर्व थाइलैंड में घटी है, यहां एक मछुआरे की किस्मत अचानक ही पलट गई और वह एक ही पल में करोड़पति बन बैठा।

थाइलैंड के एक मछुआरे हवाई नियोमादेचा को एक मोती मिला है। इस मोती की कीमत 25 करोड़ रूपए बताई गई है। यह भी कहा जा रहा है कि इवाई नियमादेचा ने सपना देखा था कि कोई बड़ा गिफ्ट मिलनेवाला है। इस सपने के बाद ही उसे समुद्र किनारे यह मोती मिला।

हवाई समुद्र तट पर अपने परिवार के हाथ सीप चुन रहा था तभी उसकी नजर पानी में तैरती एक वस्तु पर गई जिस पर कई सीप लगे थे, इनमें से तीन स्नेल शैल थे। हवाई इस सीप को लेकर पिता के पास गए, उन्होंने जब सीप की सफाई की तो उन्हें नारंगी रंग का मोती दिखाई दिया ये मोती समुद्री घोंघे (Melo Melo) से बनता है और शैल में ही रहता है जबकि पारंपरिक मोती ओष्टक के अंदर बनते है।

आजकल सीप मे समुद्री रेत के कण डालकर मोतियों का सृजन बड़ी मात्रा में होने लगा है। इसे पर्ल कल्चर फार्मिंग कहा जाता है। हम कृत्रिम सृजन प्रक्रिया से सबसे ज्यादा मोतियों का निर्माण जापान में किया जा रहा है। अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक मोती का उत्पादन क्षेत्र और साथ ही भारत के मुम्बई, हैदराबाद और सूरत में मोतियों का बड़ा व्यापार है।

अतः आपने जाना कि एक दुर्लभ प्राकृतिक मोती का जन्म किस तरह होता है, इसलिए असली मोती की कीमत सोने की तुलना में अधिक है। जिसके कारण आज पूरे भारत में कई किसान सीप की खेती का व्यापार चुन रहे है।
बहरहाल इतना तो तय है कि यह बहुमूल्य मोती बहु उपयोगी तो है ही साथ ही सुंदर आकर्षक मन को शांति देने वाला और धार्मिक दृष्टि मे भी मूल्यवान है और हम कह सकते है कि सीप के मर्म में पीड़ा से अवतरित होने वाला यह मोती दवा के रूप में मानव जाति की पीड़ा हरने का काम कर सकता है।

मोती बनने की पीड़ा और आज के कोरोना महामारी को देखते हुए यह भाव मन में आते हैं कि –

“”हर आंख यहां यूं तो बहुत रोती है, हर बूंद मगर अश्क नहीं होती है, पर देख के रो दे जो, जमाने का गम उस आंख से आँसू जो गिरे वह मोती है।”

Written by XT Correspondent

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