May 9, 2026

डॉ सुनाली खन्ना ने कहा डेंटिस्ट्री में रिसर्च को बढ़ाने से मिले हैं फ़ायदे।डेंटिस्ट्री-सेपिंग स्माइल्स चेंजिंग लाइव्स थीम पर कॉन्फ़्रेंस।

एक्सपोज़ टुडे।

डेंटिस्ट्री में रिसर्च को बढ़ावा देने ज़रूरी है क्योंकि इससे मिल सकते हैं सकारात्मक परिणाम। रिसर्च से नवाचार को भी मिलता है बढ़ावा। यह बात इंदौर में आयोजित डेंटिस्ट्री-सेपिंग स्माइल्स चेंजिंग लाइव्स थीम पर इंडियन डेंटल एसोसिएशन की 41वीं आईडीए एमपी स्टेट डेंटल कॉन्फ्रेंस में मुंबई की ख्यात डॉ. सुनाली खन्ना ने कही।

डॉ. सुनाली खन्ना एक विश्वविख्यात अनुसंधानकर्ता और वक्ता है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 62 कॉन्फ्रेंस और व्याख्यान मालाओं में भाग ले चुकी है। संयुक्त राज्य अमेरिका के मिसीसिपी राज्य की जैकसन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें 2021 में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। उनके लेख ख्याति प्राप्त जरनलों में प्रकाशित हो चुके हैं और विदेशों में प्रकाशित पुस्तकों में भी योगदान दिया है उन्हें महाराष्ट्र आरोग्य विश्वविद्यालय द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक का अवार्ड भी बहुत वर्ष पहले मिल चुका है। वह पर्यावरण की रक्षा करने के लिए सदैव कार्यरत रहती है।

मध्यप्रदेश में तंबाकू से होने वाले मुंह के कैंसर के बढ़ते हुए केसेस को देखते हुए इंडियन डेंटल एसोसिएशन के द्वारा सरकार से निवेदन किया गया की तंबाकू और उससे बनने वाले उत्पादों पर टैक्स को बढ़ाएं साथ ही तंबाकू नियंत्रण एक्ट का सख्ती से पालन किया जाए, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति बेहतर हो पाएगी और सरकार तंबाकू जनित बीमारियों के इलाज पर जो पैसे खर्च करती है, उसका सदुपयोग दूसरे जनहित के कार्यों में हो पाएगा।

कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सभी 65 मेंबर फीमेल

ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुई डेंटिस्ट्री-सेपिंग स्माइल्स चेंजिंग लाइव्स थीम पर  कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सभी 65 मेंबर फीमेल है। यह पहला मौका है कि इस तरह की किसी कॉन्फ्रेंस के सभी मेंबर फीमेल है।

50 से 60 परसेंट बच्चों में डेंटल कैविटी
डॉ. मिलिंद शाह ने कहा कि भारत के 50 से 60 परसेंट बच्चों में किसी न किसी प्रकार की डेंटल कैविटी है। आज के टाइम में पूवर ईटिंग हैबिट्स की वजह से डेंटल कैविटी बच्चों में देखने को मिल रही है। इसका एक कारण जंक फूड भी। वहीं आजकल ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों को जल्दी खाना खिलाने के लिए मोबाइल या टीवी पर कार्टून दिखाकर खिलाते है। जिस वजह से बच्चे का सारा ध्यान स्क्रीन पर होता है और वह ठीक प्रकार से चबाता नहीं है या मुंह में भरकर रखते है। इस वजह से बच्चों में बेहद कम उम्र में डेंटल प्रॉब्लम बढ़ रही है। पर अवेयरनेस न होने के कारण और रूटीन चेकअप न होने के कारण बच्चों के दांत में जब तक दर्द नहीं होता है तब तक पैरंट्स डेंटल डॉक्टर के पास नहीं जाते है। बच्चे के पहले बर्थडे के आस-पास पहली बार बच्चें को डेंटिस्ट के पास जरूर ले जाना चाहिए। इसके बाद हर 6 महीने में प्रीवेंशन के तौर पर डेंटल चेकअप कराना चाहिए और रोज सुबह-शाम फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करना चाहिए।
फीमेल कमेटी ने 3 महीने में डिजाइन की पूरी कॉन्फ्रेंस*
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ प्रशांति रेड्डी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में  ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में  डेंटिस्ट्री-सेपिंग स्माइल्स चेंजिंग लाइव्स थीम पर हो रही इस कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सभी 65 मेंबर फीमेल है। यह पहला मौका है कि इस तरह की किसी कॉन्फ्रेंस के सभी मेंबर फीमेल है। दो दिन के इस इवेंट 3 महीने में डिजाइन किया है। इसमें 18 नेशनल लेवल के की-नोट स्पीकर और 6 गेस्ट स्पीकर शामिल होने आए हैं। जिसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बंगलौर, गुजरात आदि राज्यों के एक्सपर्ट भी शामिल है।
कॉन्फ़्रेंस में आए डॉक्टरों ने कहा
डेंटल प्रॉब्लम्स का इलाज इंश्योरेंस के अंतर्गत नहीं आता है इसलिए लोग अपने दांतों का समुचित इलाज नहीं करा पाते हैं और उनके शरीर के दूसरे अंगों पर भी उसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी बोर्ड को विशेष पहल करने की आवश्यकता है। डॉ. राजीव चुघ ने आयोजन के अध्यक्षता की।
Written by XT Correspondent

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