March 7, 2026

इंदौर में 43 करोड़ के तोजी कांड में आबकारी अफ़सरों के साथ पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध।

Xpose Today News
इंदौर के आबकारी विभाग के 43 करोड़ रूपए के तोजी कांड की जांच ही नहीं पूरी हो पा रही है। इस मामले में ईडी भी पिछले दिनों शराब ठेकेदारों के यहाँ कारवाई कर चुकी है।
इस पूरे कांड में इंदौर में पदस्थ तत्कालीन आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे सहित छह अफसरों को निलंबित कर दिया था।”. इसके बाद भोपाल में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी स्तर की महिला आईएएस ने इस प्रकरण की जांच की। फिर अचानक से यह मामला इंदौर भेज दिया गया अब जांच इंदौर से चल रही है। आश्चर्य जनक बात यह है की पुलिस द्वारा गठित एसआईटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कभी अपनी जांच ही पूरी नहीं कर पाई। इस टीम में तीन बार आईपीएस स्तर के अफ़सरों को रखा गया लेकिन तीनों ने ही जांच पूरी नहीं की।इसलिए एसआईटी प्रभारी भी संदेह के घेरे में है। इनके नामों का भी Xpose Today करेगा खुलासा।
ऐसे हुआ घोटाला 
“2015 से 2018 के बीच इंदौर जिला आबकारी कार्यालय में शराब गोदामों से शराब उठाने के लिए 194 फर्जी चालानों का इस्तेमाल किया गया। बैंक में हजारों रुपयों के छोटे चालान जमा कराए गए, लेकिन चालान में बाद में लाखों की रकम दिखाकर गोदामों से ज्यादा शराब उठा ली गई और दुकानों पर बेची गई।”
आबकारी विभाग में इसके पहले तीन साल से फर्जी चालान जमा किए जा रहे थे। आबकारी विभाग के अफसरों को हर 15 दिन में चालान को क्रॉस चेक करना (तौजी मिलान) होना था, लेकिन उन्होंने तीन साल तक ऐसा नहीं किया।”
यह है मामला 
घोटाले को लेकर 12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस स्टेशन में 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर 172/2017 दर्ज की गई थी। ईडी ने आबकारी विभाग द्वारा की गई आंतरिक जांच के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के संबंध में विवरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। इस पत्र में लिखा गया है कि शराब ठेकेदारों से वसूली गई राशि, यदि कोई हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराएं।”
“इसके अलावा शराब ठेकेदारों के बैंक खाते का विवरण भी उपलब्ध कराने और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने को कहा है, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा, उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध अगर कोई जांच हुई है, तो उसकी आंतरिक जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।”
1700 करोड़ के चालान की जांच दुबे जांच के घेरे में 
“शराब घोटाले कि जांच में 11 ऑडिटरों ने एक-एक चालान की जांच की थी। घोटाले के समय से पहले के तीन सालों में इंदौर में शराब दुकानें 2015 में 556 करोड़ में, 2016 में 609 करोड़ में और 2017 में 683 करोड़ में नीलाम हुई थीं। इस तरह 1700 करोड़ के शराब के चालानों की जांच की गई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।”
इसकी वजह से उनकी साठगांठ साफ नजर आ रही थी। जिस वक्त यह शराब घोटाला हुआ था, उस वक्त जिला आबकारी कार्यालय में जिला आबकारी अधिकारी के पद पर संजीव दुबे नियुक्त थे। यही वजह रही कि आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे सहित छह अफसरों को निलंबित कर दिया था।”.
तीन साल से फर्जी चालान हो रहे थे जमा।
” घोटाले को लेकर 12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस स्टेशन में 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। उस समय आबकारी विभाग के कई अफसरों को भी निलंबित किया गया था। निलंबित अधिकारियों में जिला आबकारी अधिकारी संजीव दुबे और अन्य कई अधिकारी शामिल थे।
“आरोप है कि आबकारी विभाग में इसके पहले तीन साल से फर्जी चालान जमा किए जा रहे थे। आबकारी विभाग के अफसरों को हर 15 दिन में चालान को क्रॉस चेक करना (तौजी मिलान) होना था, लेकिन उन्होंने तीन साल तक ऐसा नहीं किया।”
“इसकी वजह से उनकी साठगांठ साफ नजर आ रही थी। जिस वक्त यह शराब घोटाला हुआ था, उस वक्त जिला आबकारी कार्यालय में जिला आबकारी अधिकारी के पद पर संजीव दुबे नियुक्त थे। यही वजह रही कि आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे सहित छह अफसरों को निलंबित कर दिया था।”.
यह हुए सस्पेंड 
“निलंबित अधिकारियों में लसूड़िया आबकारी वेयरहाउस के प्रभारी डीएस सिसोदिया, महू वेयर हाउस के प्रभारी सुखनंदन पाठक, सब इंस्पेक्टर कौशल्या सबवानी, हेड क्लर्क धनराज सिंह परमार और अनमोल गुप्ता के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा 20 अन्य अधिकारियों के तबादले भी किए थे, जिनमें उपायुक्त विनोद रघुवंशी का नाम भी शामिल था।”
यह है मामला 
“इस मामले में इंदौर के रावजी पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर 172/2017 दर्ज की गई थी। ईडी ने आबकारी विभाग द्वारा की गई आंतरिक जांच के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के संबंध में विवरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। इस पत्र में लिखा गया है कि शराब ठेकेदारों से वसूली गई राशि, यदि कोई हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराएं।”
“इसके अलावा शराब ठेकेदारों के बैंक खाते का विवरण भी उपलब्ध कराने और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने को कहा है, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा, उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध अगर कोई जांच हुई है, तो उसकी आंतरिक जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।”
“शराब घोटाले कि जांच में 11 ऑडिटरों ने एक-एक चालान की जांच की थी। घोटाले के समय से पहले के तीन सालों में इंदौर में शराब दुकानें 2015 में 556 करोड़ में, 2016 में 609 करोड़ में और 2017 में 683 करोड़ में नीलाम हुई थीं। इस तरह 1700 करोड़ के शराब के चालानों की जांच की गई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।”
ऐसे हुई ईडी की कार्रवाई
“प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर में एक साथ 18 जगहों पर छापे मारे। जिन जगहों पर छापे पड़े, उनमें ज्यादातर शराब कारोबारी शामिल हैं। ईडी की टीमों ने बसंत विहार कॉलोनी, तुलसी नगर और महालक्ष्मी नगर इलाकों में कार्रवाई की।”
“ईडी की कार्रवाई फर्जी बैंक चालान और आबकारी विभाग में हुए घोटाले को लेकर की गई है। यह घोटाला सबसे पहले साल 2018 में सामने आया था। शराब कारोबारियों ने आबकारी विभाग के अफसरों के साथ मिलकर करोड़ों का घोटाला किया। माना जा रहा है कि घोटाले की रकम 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।”
घोटाले की शिकायत मिलने के बाद ईडी ने 2024 में जांच शुरू की थी। जांच के लिए ईडी ने आबकारी विभाग और पुलिस से कई जरूरी दस्तावेज मांगे थे, जैसे कि शराब ठेकेदारों के बैंक अकाउंट का ब्योरा और विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट।”
इनके यहां ईडी ने मारे छापे
“एमजी रोड समूह के अविनाश और विजय श्रीवास्तव”
“जीपीओ चौराहा समूह के राकेश जायसवाल”
“तोपखाना समूह के योगेंद्र जायसवाल”
“बायपास चौराहा देवगुराड़िया समूह के राहुल चौकसे”
“गवली पलासिया समूह के सूर्यप्रकाश अरोरा”
“गोपाल शिवहरे, लवकुश और प्रदीप जायसवाल के ठिकानों पर भी छापे मारे गए हैं।”
Written by XT Correspondent

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