April 29, 2026

यूं पॉलिसी लेकर किया मनी बेक।

लेखक डॉ आनंद शर्मा रिटायर्ड सीनियर आईएएस अफ़सर है और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पूर्व विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी है।

रविवारीय गपशप
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जैसे दुनिया में इश्क से कोई आज तक बचा नहीं है , वैसे ही सरकारी नौकरी में जिस एक शख्स से आप बच नहीं पाएंगे वो है बीमा एजेंट |अब तो खैर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बहुत से सूटेड बूटेड मॉडल नुमा एजेंट आ गए हैं , पर नौकरी के शुरुवाती दिनों में तो जीवन बीमा निगम के खांटी एजेंट ही हुआ करते थे | बात लगभग 1987 की है , मुझे अपने परिवीक्षा काल में ही राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ अनुविभाग का एस.डी.एम. नियुक्त कर दिया गया था |

उन दिनों नये अनुविभागों में वाहन नहीं हुआ करते थे , डोंगरगढ़ भी नया अनुविभाग था सो ब्लाक की मोटर साइकिल ही एकमात्र सरकारी वाहन हुआ करती थी ।उन्ही दिनों तेंदू पत्ता तोड़ने का कार्य वन समितियों से प्रारंभ हुआ और हम लोगों को निगरानी के लिए पहली बार किराये की जीप दी गयीं , सो दिन भर जंगलों में निगरानी के लिए बेख़ौफ़ भ्रमण । थोड़े दिन बाद मैं जीप चलाना सीख गया , पर जल्द ही तेंदुपत्ता सीजन समाप्त हो गया , और हम फिर अपनी ब्लाक की मोटर साइकिल पर आ गए ।

हमारे बी डी ओ साहब ने एक दिन मुझसे कहा कि साहब ब्लाक के गेरेज में वर्ल्ड बैंक की किसी परियोजना की एक जीप रखी है यदि उसे ट्राई करें तो ? मैं तुरंत उत्साह से भर उठा , पर जब उसे देखा तो घोर निराशा के अंधकार में डूब गया | जीप क्या थी कबाड़ा ही था सीटें सब चूहे खा चुके थे और एंजिन का भगवान ही मालिक था । जैसे तैसे उस जीप को ले जा कर गेरेज में डाला गया ताकि वह किसी प्रकार सड़क पर चलने योग्य बन जाये ।

इस बीच एक और दिलचस्प किस्सा हुआ , एक बीमा एजेंट महोदय ने मुझ से ऑफिस में दो चार बार मुलाक़ात की ,शुरू में औपचारिक फिर गहन | आरम्भ में तो मैंने टाला , कभी काम के बहाने कभी दौरे के , पर बंदा बड़ा ही पक्के निश्चय का था एक दिन यूँ ही मैंने कह दिया की यार तुम रोज रोज दफ्तर मत आया करो किसी दिन घर आओ इत्मीनान से बातें करेंगे । अगले रविवार की सुबह सात बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया , बड़ी देर तक जब आगंतुक न माना तो मैंने जाकर खिड़की से देखा , तो वही सज्जन थे बीमा एजेंट श्री चौहान ।

मुझे गुस्सा आया और उन पर भड़क गया कि ये कोई वक्त है आने का , सुबह के सात बजे ? उसने पीछे हटते हुए मासूमियत से कहा कि आप ही ने घर फुर्सत में आने को कहा था । मैंने कहा कि क्या तुम्हे ये बिलकुल समझ नहीं आता कि मुझे कोई पालिसी लेनी ही नहीं है ,,,,मै तो तुम्हे बुरा न लगे इसलिए टाल रहा था , और अब तुम सुनना है चाहते हो तो सुनो “ मुझे कोई पालिसी नहीं लेनी “ ठीक . अब जाओ और मैंने दरवाजा बंद कर दिया |
इस घटना के दुसरे ही दिन वर्ल्ड बैंक की वो जीप जैसे तैसे बन कर आ गयी । अगले रविवार दोपहर बाद जब मैंने ड्राईवर का पता किया तो मालुम हुआ कि वह तो छुट्टी समझ कर चला गया था | मुझे बड़ी बैचेनी हो रही थी , गाड़ी चलाना तो मै सीख ही चुका था और नया सिखैय्या जाने है कि उसे सबसे ज्यादा आवे है सो मैंने सोचा की चलो अपन ही लिए चलते है । डोंगरगढ़ से राजनांदगांव जाने के लिए मेन रोड तक लगभग 15 किमी का रास्ता है , सोचा इतनी सैर तो बनती है |

शाम का समय था लगभग 5 बजे ये रास्ता ज्यादा चलता न था और मुझ जैसे नए सिखाड़ी के लिए मुफीद भी था तो मैं चल पड़ा अकेले ही | शहर छोड़ते जैसे ही जीप पांच सात किमी चली होगी अचानक बंद पड़ गयी । क्लच ,एक्स्सिलिरेटर ,स्टेयरिंग और ब्रेक के सिवा कुछ और मुझे आता ही नहीं था | शाम घिरने लगी थी , कोई आ जा ही नहीं रहा था । सरकारी गाड़ी , अकेला मैं , क्या करें कहाँ जाएँ , गाड़ी किसके भरोसे छोड़ें , ढेर असमंजस | तभी दूर से मोटर साइकिल आती दिखी , जैसे मुर्दे में जान पड़ गयी हो ,मैं लपक के बीच रास्ते खड़ा हो गया | वाहन रुका तो उसमे बीमा एजेंट चोहान साहब थे …….मैं तो बेजुबान हो गया । क्या कहूँ इससे ? पर वो भला मानुस तुरंत उतरा और कहा क्या हो गया साहब , मैंने झेंपते हुए जबाब दिया , क्या बताऊँ गाड़ी बिगड़ गई है और मुझे कुछ आता नहीं है | उसने बड़ी अहतियात के साथ इधर उधर कुछ चेक किया और बोला कुछ नहीं साहब इसका पेट्रोल ख़त्म हो गया है , और आप इसको ले कर कहाँ चल दिए ?

ये तो हाथी है हाथी , खैर कोई बात नहीं , आप यहाँ कहाँ खड़े रहेंगे , सामने मेन रोड पर पेट्रोल पम्प से पेट्रोल ले आते हैं कोई कुप्पी वुप्पी है या नहीं ? मैंने न में सर हिलाया तो उसने कहा चलिए पम्प से मांग लेगें । मैंने कहा भैया मेरे पास तो पैसे भी नहीं हैं मैं तो यूँ ही सैर के चक्कर में खाली जेब ही चला आया था |

वो बोला अरे पैसे आते रहेंगे आप आइये | हम साथ गए और वाकई पेट्रोल डालते ही गाड़ी स्टार्ट हो गयी मैं गाड़ी को चला कर घर लौटा और दुसरे ही दिन मैंने दो काम किये , पहला तो उस खटारा हाथी को वापस उसके स्थान पर खड़ा कर दिया और दूसरा चोहान साहब से पचास हज़ार की मनी बैक पालिसी ले ली |

Written by XT Correspondent

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