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पिंटू, चंपू, चिराग़, चुग, यह किसी फ़िल्म के विलेन की तरह यह इंदौर के व्हाइट कॉलर भू माफियाओं नाम हैं जो इंदौर विकास प्राधिकरण(आईडीए) की करोड़ों रूपए की बेशक़ीमती ज़मीनों से खेल रहे है। आईडीए की फर्जी एनओसी बनाने का मामला हो या प्राधिकरण की करोड़ों रूपए की बेशक़ीमती ज़मीन पर हाउसिंग सोसाइटी के मार्फ़त खेल करना हो सभी में इंदौर भू माफिया आईडीए पर हावी है। आईडीए के एक पूर्व अफसर की मिलीभगत से आईडीए की कई एनओसी जारी हो चुकी हैं। ताज़ा मामला रिंग रोड पर तृष्णा गृह निर्माण संस्था की आवासीय उपयोग की भूमि पर फर्जी एनओसी के माध्यम से बने सी-21 बिजनेस पार्क का है जब आईडीए ने एनओसी नहीं जारी की तो फिर फर्जी एनओसी तैयार करने का अपराध क्यों नहीं दर्ज करा रहा है ? अब एक्सपोज़ टुडे इस मामले में लोकायुक्त को शिकायत कर रहा है।
पूर्वी रिंग रोड पर तृष्णा गृह निर्माण संस्था की आवासीय उपयोग की भूमि पर फर्जी एनओसी के माध्यम से बने सी-21 बिजनेस पार्क की जांच चल रही है। यहां पर सी 21 बिज़नेस पार्क बना है। सवाल यह है की रातों रात यह इमारत तो नहीं बनी जब यह खेल चल रहा था तब अफसर पैसा लेकर मौन स्वीकृति देते रहे।आईडीए के रिकॉर्ड में वर्ष 1997, 1998 में जारी 1700 नंबर की एनओसी के आईडीए से जारी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। आवक-जावक रजिस्टर में भी इसकी एंट्री नहीं है। अब यह मामला खुला है तो आईडीए और जिला प्रशासन के अफसर कार्रवाई की बात कर रहे हैं लेकिन कार्रवाई हो नहीं रही है। कारवाई क्यों नहीं हो पा रही है यह क़िले का रहस्य नहीं है।
कलेक्टर के निर्देश पर सी-21 बिजनेस पार्क के संबंध में अपर कलेक्टर गौरव बैनल ने आईडीए को जो पत्र जारी किया था उस संबंध में आईडीए ने कुछ कार्रवाई नहीं की है। क्योंकि एनओसी कांड में टीएनसीपी, आईडीए और भू माफिया गैंग फर्जी एनओसी कांड में टीएनसीपी, आईडीए और भू माफिया गैंग की भूमिका सामने आ रही है। दो पूर्व अधिकारियों का नाम आ रहा है। इनकी घेराबंदी होने पर खुलासा हो जाएगा।
