March 7, 2026

पूर्व चीफ सेक्रेटरी के बेटे सीनियर आईपीएस डीजी रेल मनीष शंकर शर्मा का निधन।

Xpose Today News 

प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (रेल) और 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी मनीष शंकर शर्मा का इलाज के दौरान दिल्ली में देर रात निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से भोपाल लाया जा रहा है। अंतिम संस्कार भोपाल में किया जाएगा। इंदौर के डेली कॉलेज में पढ़ें शर्मा के पिता कृपा शंकर शर्मा मध्य प्रदेश सरकार में चीफ सेक्रेटरी रहे हैं । उनके चाचा डॉ. सीताशरण शर्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं। मूल रूप से नर्मदापुरम के रहने वाले मनीष शंकर शर्मा ने मध्य प्रदेश के रायसेन, सतना, छिंदवाड़ा और खंडवा जिलों में एसपी के रूप में भी कार्य किया।

प्रतिष्ठित करियर और उल्लेखनीय योगदान

मनीष शंकर शर्मा भारतीय पुलिस सेवा में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने मध्य प्रदेश शासन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 1997-1998 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत बोस्निया और हर्जेगोविना में सेवाएं दीं, जहां उन्होंने स्थानीय पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा, वे सुरक्षा निदेशक (एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और टी-बोर्ड ऑफ इंडिया के निदेशक भी रहे।

अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पहचान

मनीष शंकर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त थी। उन्हें अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन डिएगो शहर में विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

सैन डिएगो के महापौर केविन एल. फॉकनर ने 20 जुलाई को उन्हें सम्मानित करते हुए इस दिन को हर साल ‘मनीष शंकर शर्मा दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
इसके अलावा, उन्हें यूएस हाउस ऑफ रिप्रिजेंटेटिव्स का सर्टिफिकेट ऑफ स्पेशल कांग्रेसनल रिकग्निशन भी प्रदान किया गया था।

आईए जानते हैं आईपीएस मनीष शंकर शर्मा के बारे में 

वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध मध्यप्रदेश के ऊर्जावान एडीजी मनीष शंकर शर्मा को एक उम्दा रणनीतिकार माना जाता है। अपने 28 वर्षों की नौकरी में वे दुनिया के चार महाद्वीपों में सेवाएं दे चुके हैं। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी  मनीष शंकर शर्मा कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं। वह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल सिक्युरिटी, काउंटर टेरेरिज्म एंड पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स डिग्री प्राप्त हैं। होशंगाबाद के मूल निवासी मनीष का जन्म 11 मई 1966 को राज्य के प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके आईएएस पिता केएस शर्मा मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव रहे हैं। मनीष शंकर शर्मा ने इंदौर के डेली कॉलेज से स्कूलिंग और भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद बिड़ला इंस्टीट्यूट, पिलानी से मार्केटिंग में एमबीए भी किया। 1992 बैच में उनका आईपीएस में चयन हुआ। वर्ष 1997 में करीब एक साल के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत बोस्निया और हर्जेगोविना में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गये। जहां उन्होंने स्थानीय पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी। संयुक्त राष्ट्र मिशन से लौटने के पश्चात वे रायसेन, सतना, छिंदवाड़ा और खंडवा आदि जिलों में एसपी रहे। इस दौरान इस ऊर्जावान आईपीएस ने अपनी जवाबदेह कार्यशैली, दूरदर्शिता, क्राइम कंट्रोल, लॉ एंड ऑर्डर में सुधार और व्यवहार कुशलता से बड़ी पहचान कायम की, खासकर कमजोर तबके को न्याय दिलाने की इनकी प्रतिबद्धता आज भी लोगों के बीच चर्चा में है।‌ फरवरी 2005 में मनीष शंकर शर्मा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली आ गए, जहां मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के अंतर्गत उन्हें करीब तीन वर्षों के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी का सिक्योरिटी डायरेक्टर बनाया गया। यहां देशभर के 114 एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी इनके ऊपर थी।अगस्त 2008 में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने उन्हें टी बोर्ड इंडिया के लिये वेस्ट एशिया एंड नॉर्थ अफ्रीका का डायरेक्टर बनाया गया। अपने करीब तीन साल की पोस्टिंग के दौरान इन्होंने टी बोर्ड के वैश्विक व्यापार को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सितंबर 2011 में मनीष मध्यप्रदेश कैडर लौट आये। आईजी, भोपाल के तौर पर इन्होंने पुलिस सर्विस रिफॉर्म पर जोर दिया और पुलिस सर्विस में समय से प्रमोशन, पुलिसकर्मियों की समस्या के समाधान और पुलिसकर्मियों को सुविधा पर विशेष ध्यान दिया। जिससे वे जनता के साथ पुलिसकर्मियों में भी लोकप्रिय हुए।‌ मई 2017 में उनकी पदोन्नति एडीजीपी के पद कर हुई। वर्तमान में मनीष शंकर शर्मा मध्यप्रदेश के एडिशनल डायरेक्टर जनरल कंट्रोलिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी, प्राइवेट सिक्योरिटी के पद पर रहे हैं।‌ मनीष शंकर शर्मा ने आईएसआईएस की स्थापना, उसके मकसद, कार्यप्रणाली, वित्तीय संसाधनों पर वृहद अध्ययन किया, साथ ही इसपर काबू पाने के लिए एक वैश्विक रणनीति का तरीका भी बनाया। मनीष एक बेहतरीन वक्ता और लेखक भी हैं। विश्व भर में आतंकवाद प्रबंधन आदि विषयों पर उन्होंने उम्दा संबोधन किया है। वैश्विक आतंकवाद की प्रसिद्ध पुस्तक ‘ग्लोबल टेररिज्म-चैलेंजेस एंड पॉलिसी ऑप्शंस’ में योगदान देने वाले वे एकमात्र भारतीय लेखक हैं। मनीष शंकर शर्मा को कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मान, पदक और पुरस्कार प्राप्त हैं। वे यूनाइटेड नेशंस पीस मेडल, नेशनल लॉ डे अवॉर्ड, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अवॉर्ड, भारत के दस चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों को मिलने वाला रोल ऑफ ऑनर और पद्मश्री “आरएन जुत्शी मेडल” से सम्मानित हैं। वर्ष 2015 में सैन डिएगो की सिटी काउंसिल ने मनीष शंकर शर्मा का विशेष रूप से अभिनंदन कर और 20 जुलाई का दिन शहर में ‘मनीष शंकर शर्मा डे’  के तौर पर मनाया। इन्हें अमेरिकी संसद के ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव’ ने भी सम्मानित किया है।

फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट सर्वे “25 उत्कृष्ट आईपीएस 2020” के वार्षिक सर्वे में  मनीष शंकर शर्मा “ऊर्जावान” श्रेणी में प्रमुख स्थान पर हैं।

साहित्यिक योगदान

वैश्विक आतंकवाद पर लिखी गई पुस्तक ‘ग्लोबल टेररिज्म-चैलेंजेस एंड पॉलिसी ऑप्शंस’ में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस पुस्तक में योगदान देने वाले वे एकमात्र भारतीय लेखक थे।

यह है पारिवारिक पृष्ठभूमि

मनीष शंकर शर्मा के पिता कृपा शंकर शर्मा मध्य प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव रह चुके हैं। उनके चाचा डॉ. सीताशरण शर्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं। मूल रूप से नर्मदापुरम के रहने वाले मनीष शंकर शर्मा ने मध्य प्रदेश के रायसेन, सतना, छिंदवाड़ा और खंडवा जिलों में एसपी के रूप में भी कार्य किया।

Written by XT Correspondent

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