छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में महिलाओं ने बिना किसी सरकारी मदद के आत्म निर्भरता की ओर कदम बढ़ा लिए हैं। आज क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं स्कूल ड्रेस सिल कर अच्छा मुनाफा कमाने की ओर कदम बढ़ा रही है। इन महिलाओं के हाथ में स्थाई काम आने से आने वाले समय में इनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
दरअसल कोरोना संकट के कारण लोगों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इस बीच छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव ब्लॉक में कुछ महिलाओं की पहल ने आज सैकड़ों महिलाओं को रोजगार से जोड़ दिया है। इन दिनों ब्लॉक की 500 से ज्यादा महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलने का प्रशिक्षण ले रही है। आजीविका मिशन द्वारा महिलाओं को दिया जा रहा 15 दिनों का प्रशिक्षण जल्द ही पूरा होने वाला है।
ख़ास बात यह है कि इस काम के लिए महिलाएं सिलाई मशीन, धागा और कपड़ा अपने घर से लेकर आई है। इससे बिना किसी सरकारी मदद के महिलाएं अलग-अलग समूह बनाकर काम कर रही है। काम करने के लिए महिलाओं ने कमरा भी चंदा जुटाकर किराए पर लिया है। साथ ही अपने खर्चे पर चौकीदार भी रखा है, ताकि रात में मशीनों की सुरक्षा हो सके।
समूह की अध्यक्ष का कहना है कि लॉकडाउन में महिलाओं के पास कोई काम नहीं था। ऐसे में उन्होंने स्कूल ड्रेस सिलने की योजना बनाई। महिलाओं के पास सिलाई मशीन होती है, इस कारण इस काम को शुरू करने में कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा। ऐसे में आजीविका मिशन के सहयोग से स्कूल ड्रेस सिल कर महिलाओं को हर महीने 8 हजार रुपए की आमदनी होगी।
उन्होंने बताया कि इस समय महिलाएं स्कूल ड्रेस की सिलाई करेगी। यह काम पूरा होने के बाद बुटिक का काम शुरू करेंगे। सिलाई से जुड़ा हुआ अगर कोई और काम मिलेगा उसे भी करेंगी।
वहीं जिला पंचायत छिंदवाड़ा के सीईओ का कहना है कि हर साल स्कूल के छात्र-छात्राओं को बाहर से खरीदी हुई ड्रेस पहनाई जाती थी, लेकिन इस बार स्थानीय महिलाओं के सहयोग से ड्रेस तैयार की जा रही है। इससे महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और ड्रेस की गुणवत्ता भी अच्छी रहेगी।
