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कांग्रेस की प्रदेश महामन्त्री एवं सह-प्रभारी (प्रशिक्षण विभाग) तथा वार रूम की राष्ट्रीय समन्वयक निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी रीवा में प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से मिलने पहुंची। दरअसल केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित हो रहे छतरपुर और पन्ना जिले के आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी रीवा में प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से भेंट कर प्रभावितों का पक्ष मजबूती से रखा। वे लंबे समय से आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रयास कर रही है।
निधि चतुर्वेदी ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी सक्रियता का उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीति से परे, केवल उन परिवारों को उनका कानूनी और मानवीय अधिकार दिलाना है जो विकास की राह में अपना सब कुछ न्योछावर कर रहे हैं। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और सर्वे में विसंगतियां ग्रामीणों के बीच भय पैदा कर रही हैं।
प्रमुख बिंदु जिन पर निधि चतुर्वेदी ने ज़ोर दिया:
निष्पक्षता और मेहनत: पिछले कुछ समय से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही निधि ने कहा कि शासन-प्रशासन को आंदोलनरत आदिवासियों के प्रति दमनकारी नीति के स्थान पर मानवीय व्यवहार अपनाना चाहिए।
मांगें पारदर्शी भू-सर्वेक्षण, बाजार दर पर मुआवजा, और आदिवासियों की आजीविका सुरक्षित करने हेतु ‘भूमि के बदले भूमि’ का प्रावधान।
उच्च स्तरीय समिति: उन्होंने सुझाव दिया कि एक निगरानी समिति का गठन हो जो विस्थापन की हर कड़ी की जांच करे।
निधि चतुर्वेदी ने कहा, *”पद और दायित्व समाज की सेवा के माध्यम हैं। मेरा निरंतर प्रयास है कि विकास की इस प्रक्रिया में भूमिपुत्रों के हितों की अनदेखी न हो। माननीय उप-मुख्यमंत्री जी का आश्वासन सकारात्मक है और मुझे विश्वास है कि सरकार संवेदनशीलता दिखाएगी।”*
उप-मुख्यमंत्री शुक्ला ने निधि चतुर्वेदी द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि प्रभावित परिवारों के साथ पूर्ण न्याय किया जाएगा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
