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प्रवर्तन निदेशालय (ED), इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने आलोक शारदा और अन्य से संबंधित बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के प्रावधानों के तहत दिनांक 10-09-2026 को ₹ 13 करोड़ मूल्य की 18 अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से कुर्क (Attach) किया है।
ईडी (ED) की जांच ईओडब्ल्यू (EOW), भोपाल द्वारा दर्ज दो प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर शुरू की गई थी, जो आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से संबंधित हैं।
ईडी की जांच से खुलासा हुआ है कि मेसर्स शारदा वेयरहाउस, मानपुर, जिला इंदौर के प्रोपराइटर आलोक शारदा ने अन्य लोगों की मिलीभगत से वेयरहाउस रसीद वित्त योजना (Warehouse Receipt Finance Scheme) का दुरुपयोग किया। उन्होंने वेयरहाउस में किसानों की कृषि उपज (सोयाबीन एवं चना) रखे होने का झूठा दावा कर फर्जी वेयरहाउस रसीदें जारी कीं। इन्हीं रसीदों के आधार पर 62,965 बोरी सोयाबीन और चने के एवज में 42 किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत कराए गए। जांच में आगे यह भी पता चला कि गिरवी रखी गई उपज को बिना किसी अनुमति के वेयरहाउस से हटाकर बेच दिया गया, जबकि ऋण सुविधाओं को जारी रखने और प्राप्त करने के लिए फर्जी/बनावटी वेयरहाउस रसीदों, स्टॉक उपलब्धता के झूठे दावों और रिकॉर्ड छिपाने/हटाने का सहारा लिया गया। इसके जरिए आईडीबीआई बैंक को ₹ 14.04 करोड़ का अवैध नुकसान पहुंचाया गया और आरोपियों ने अनुचित लाभ कमाया।
इसी प्रकार, मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने भी आलोक शारदा को उसी वेयरहाउस में रखी बताई गई कृषि उपज के एवज में ₹ 12.04 करोड़ का वेयरहाउस रसीद वित्त स्वीकृत किया था। बाद में किए गए भौतिक सत्यापन में गिरवी रखी गई सामग्री में भारी कमी पाई गई। जांच में सामने आया कि ऋणदाता से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अनुमति लिए बिना ही गिरवी रखे गए माल को अवैध रूप से हटाकर खुर्द-बुर्द कर दिया गया था।
इस प्रकार, आलोक शारदा और अन्य आरोपी व्यक्तियों ने आपस में मिलीभगत कर आईडीबीआई बैंक और मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को लगभग ₹ 26 करोड़ का गैर-कानूनी नुकसान पहुंचाया और खुद अनुचित लाभ प्राप्त किया।

