पन्ना। मकर संक्रांति पर पन्ना जिले के पहाड़ीखेरा से लगभग छह किलोमीटर दूर बृहस्पति कुंड पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुंड पर स्नान करने के लिए पहुँचते हैं। औषधीय गुणों से युक्त बृहस्पति कुंड के पानी में स्नान करने से कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है।
दरअसल बृहस्पति कुंड एक प्राचीन मनोरम स्थल है। यहाँ पांच सौ फिट गहरा प्राकृतिक सौन्दर्य से युक्त सात कुंडो वाला सुंदर जल प्रपात है। यहाँ पर पिछले सौ सालों से मकर संक्रांति पर मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि प्राचीन समय में मुनि बृहस्पति मकर संक्रांति पर यहाँ हवन करते थे। तभी से यहाँ मेला लगने की परम्परा चलती आ रही है।
बृहस्पति कुंड के ऊपरी सतह पर राम, लक्ष्मण जानकी सहित हनुमान जी का अत्यंत प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर से लगी भूमि पर बने आश्रम में संत निवास करते हैं। इस स्थान पर रहकर अनेक संतों ने भगवान की आराधना की है। मौनी महाराज ने यहाँ बारह वर्षों तक मौन रहकर भगवान की आराधना की है। उनकी वजह से बृहस्पति कुंड की ख्याति देश भर में पहुंची।
हालाँकि मनोरम और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा यह स्थल आज भी उपेक्षा का शिकार हो रहा है। बृहस्पति कुंड की विशालता में भी कमी आई है। यहाँ सुरक्षा और आवागमन के साधनों का भी अभाव है।
