उमरिया। बाँधवंगढ़ टाइगर रिजर्व आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार विदेशी पर्यटकों की आवक में 50 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। इससे राजस्व और रोजगार को भारी नुकसान हुआ है।
दरअसल देश भर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन का असर पर्यटन पर भी पड़ रहा है। हिंसा के कारण विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। उमरिया जिले के बाँधवंगढ़ टाइगर रिजर्व पर भी इसका असर साफ़ देखा जा रहा है। बीते वर्ष 2018-19 में नवंबर, दिसम्बर और जनवरी महीने में बाँधवंगढ़ टाइगर रिजर्व आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या क्रमशः 4599, 3218, 2225 थी। वहीँ इस साल नवंबर में 3343 और दिसम्बर में 2261 विदेशी पर्यटक ही यहाँ पहुंचे। जनवरी माह की 20 तारीख तक महज 200 विदेशी पर्यटक ही बाँधवंगढ़ पहुंचे।
बाँधवंगढ़ टाइगर रिजर्व में नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीने में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुँचते हैं। इस दौरान विदेशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद थी। जानकर विदेशी पर्यटकों की संख्या घटने के पीछे सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। हालाँकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में पर्यटन बेहतर होगा।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में आई गिरावट के कारण बाँधवंगढ़ टाइगर रिजर्व के राजस्व के साथ-साथ स्थानीय रोजगार भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार बाँधवंगढ़ के आसपास के गांव के लोग टाइगर रिज़र्व में जिप्सी चालक गाइड एवं परिवहन होटल के रोजगार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में विदेशी पर्यटकों की संख्या कम होना स्थानीय रोजगार को भी प्रभावित कर रहा है।
वहीँ पार्क प्रबंधन विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी के लिए नए साल की शुरुआत में खराब मौसम, बर्फबारी का होना भी कारण मानते हैं। लेकिन देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद देश भर में भड़की हिंसा को देखते हुए अमेरिका एवं यूरोप के देशों द्वारा अपने नागरिकों को भारत भ्रमण के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी थी जो विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी होने की मुख्य वजह है।
नागरिकता संशोधन कानून से पूरा पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ है। बाँधवंगढ़ टाइगर रिज़र्व के अलावा खजुराहो, पन्ना, कान्हा एवं सतपुड़ा में भी कानून लागू होने के बाद विदेशी पर्यटकों की आवक कम हुई है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा विदेशी पर्यटकों की लगातार घटती संख्या को लेकर न तो कोई चिंता जाहिर की गई और न ही कोई उपाय किए गए है।
