बालाघाट। ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएँ देकर लौट रहे स्वास्थ्यकर्मियों की जान उस समय सांसत में आ गई जब अचानक उनका सामना बाघों से हो गया। वह जिस सड़क से लौट रहे थे, उस सड़क पर चार बाघों ने डेरा डाला हुआ था। हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों ने संयम का परिचय देते हुए गाड़ी के कांच बंद कर दिए और बाघों के सड़क से हटने का इंतजार करते रहे। कुछ देर बैठे रहने के बाद बाघ वहां से चले गए और स्वास्थ्यकर्मियों ने राहत की साँस ली। घटना 14 अप्रैल की शाम साढ़े पांच बजे की बताई जा रही है।
दरअसल बालाघाट के बैहर की स्वास्थ्यकर्मियों एक टीम दूरस्थ ग्राम पटवा में बच्चों का टीकाकरण करके लौट रही थी। टीम में सेक्टर सुपरवाइजर विनोद बंधईया, एएनएम प्रीति जंघेला, बिंदु बर्मन, मधु शिवा समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी थे, जो चार पहिया वाहन से वापस लौट रहे थे। इस दौरान राष्ट्रीय कान्हा उद्यान से लगे सुपखार के घने जंगलों के पास उनका सामना सड़को पर आराम से बैठे बाघों से हो गया।
हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों ने बड़े ही सूझबूझ और विवेक से काम लेते हुए गाड़ी का कांच बंद कर दिया और बाघों के सडकों से हटने का इंतजार करते रहे। कर्मचारियों के अनुसार उनकी टीम बाघों के झुंड के बेहद करीब थी और कुछ देर उनको घूरने के बाद बाघ सड़क से हटकर जंगल में चले गए। इसकी जानकारी उन्होंने अपने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी।
बता दे कि घने जंगलों से घिरे बालाघाट जिले के दूरस्थ वन ग्रामीण अंचलों में वन्य प्राणी और बाघ जैसे हिंसक वन्य प्राणी गाहे-बगाहे राहगीरों को दिखते रहते है। लेकिन बाघों का सामना दिल दहला देने वाला ही साबित हुआ है। राष्ट्रीय कान्हा उद्यान से लगे होने के कारण बाघों से सामना होना भी स्वास्थ्य टीम के लिए सांसे थाम देने वाला साबित हुआ क्योंकि इस बार चार बाघों का एक साथ सामना हुआ था। गनीमत रही कि बाघ आक्रामक नही हुए और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सूझबूझ से बड़ी घटना टल गई। बहरहाल इस घटना को लेकर खूब चर्चा हो रही है।
