शिवपुरी। लॉकडाउन के कारण इन दिनों शिवपुरी के करीब 20 हजार मजदूरों के सामने रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। दूसरे शहरों में काम कर अपना जीवन यापन करने वाले यह मजदूर लॉकडाउन के अपने गांव लौट आए हैं। इन मजदूरों के पास आज खाने तक के लाले पड़े हुए हैं। साथ ही मजदूरों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा है।
दरअसल शिवपुरी में ऐसे 20 हजार से ज्यादा मजदूर हैं जो गुजरात, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, इंदौर या अन्य बड़े शहरों में काम कर रहे थे। स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं होने के कारण मजदूरों ने बड़े शहरों का रुख किया था, लेकिन कोरोना वायरस ने सब चौपट कर दिया। लॉकडाउन लगने के कारण शहरों में काम बंद हो गया तो मजदूर जैसे-तैसे अपने-अपने गांवों में लौट आए। मजदूर लॉकडाउन में शिवपुरी तो आ गए लेकिन अब यहां उनके सामने भरण पोषण की परेशानी आ खड़ी हुई है। कई मजदूरों के पास राशन कार्ड नहीं होने से उन्हें सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
गुजरात में काम करने वाले और इस समय अपने घर लौटै रायश्री के रहने वाले हिम्मत परिहार ने बताया कि उनके सामने परिवार के भरण पोषण की परेशानी आ गई है। रातौर के गोपाल का कहना है कि शिवपुरी आने पर यहां पर उनका राशन कार्ड या दूसरी सरकारी योजना का कार्ड भी नहीं है जिससे उन्हें राशन या अन्य मदद मिल सके। कुल मिलाकर आने वाला समय परेशानी का है। अपने गांव लौटे कई मजदूरों ने बताया कि शिवपुरी में पहले ही पत्थर की खदानें बंद हो गईं साथ ही दूसरे रोजगार के साधन हैं नहीं। ऐसे में अब यहां पर रोजगार की आस लगाना समुद्ध में पत्थर तलाशने जैसा है।
इसके अलावा बड़े शहर जैसे गुजरात, दिल्ली व जयपुर में कब हालात सामान्य होंगे यह कोई नहीं बता सकता। यहां लौटे मजदूरों का कहना है कि हम यहां पर काम करते थे वहां पर दोबारा से रोजगार मिल पाएगा कि नहीं यह भी हमें पता नहीं। हमारा भविष्य अब अंधकारमय है। इसलिए इन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार दिलाना सबसे बड़ी चुनौती होगा। इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पहल करना होगी जिससे मनरेगा व दूसरे निर्माण कार्यों से इन्हें रोजगार मिल सके।
शिवपुरी जिले में समय 20 हजार से ज्यादा मजदूर अपने गांव की ओर लौट आया है। जो बड़े शहरों में काम करते थे आज इनके सामने रोजी रोटी का संकट है। प्रशासन और प्रदेश सरकार से हमारी मांग है कि इन्हें खानपान की व्यवस्था और रोजगार की व्यवस्था की जाए जिससे इनके सामने वर्तमान में पैदा हुए संकट के हालात से इन्हें बाहर निकाला जा सके।
