नरसिंहपुर। एक ऐसा थाना जिसके प्रभारी की कुर्सी पर जो भी बैठता है उसे सस्पेंड या लाइन अटैच होने का डर सताने लगता है। बीते कुछ सालो में जो भी थानेदार यहां आया उसे किसी न किसी वजह से कुर्सी से हाथ धोना पड़ा और खुद की वर्दी पर भी बदनामी का दाग झेलना पड़ा।
नरसिंहपुर का गाडरवारा थाना एक ऐसा थाना है जहां कोई भी थानेदार के रूप में पदस्थ होना नहीं चाहता है। यहां आते ही थानेदार को अपने वर्दी पर दाग लगने का डर सताने लगता है। यहां पदस्थ लगभग हर थानेदार को किसी न किसी वजह से सस्पेंड करके या किसी अन्य गलती की वजह से उसे लाइन अटैच कर दिया जाता है।
पिछले कुछ सालों के आंकड़े भी यही हकीकत को दोहराते नजर आ रहे हैं। मसलन आरडी मिश्रा, पीएस ग्रेवाल, शैलेश मिश्रा, उमेश तिवारी, मुकेश खम्परिया, अरविंद दुबे, संजय दुबे, अरविंद चौबे और अब हाल ही ने रामफल गोंड को गाडरवारा टी आई के पद से हटाया गया है। ये आंकड़े लगातार हटाए गए थाना प्रभारियों के है।
जिले के ए एसपी बताते है की एक दर्जन से अधिक थाना प्रभारियों को लगातार हटाया गया है। हालांकि इसके पीछे वह इन प्रभारियों की कर्तव्यनिष्ठा में चूक होना बता रहे हैं। ए एसपी भले ही कुछ भी कहें लेकिन फ़िलहाल तो यह भय नरसिंहपुर में पदस्थ हर नगर निरीक्षक को सताता है कि कहीं उन्हें हिस्से में यह कांटो भारी कुर्सी न आ जाए।
