शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी में कोरोना संक्रमण के कारण टोटल लॉकडाउन लागू किया गया है। लेकिन अब शिवपुरी में लॉकडाउन के नेगेटिव इफेक्ट दिखाई देने लगे हैं। लॉकडाउन के कारण गरीब व मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। ऐसे में अब लॉकडाउन का विरोध भी शुरू हो गया है।
सपाक्स समाज संगठन के जिला सचिव और वात्सल्य समूह महेन्द्र जैन भैयन ने टोटल लॉकडाउन का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि टोटल लॉकडाउन सही व्यवस्था नहीं हैं। प्रशासन को आम गरीब, मजदूर व मध्यम वर्गीय दुकानदारों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया के जरिए कलेक्टर के नाम एक पत्र भी लिखा है।
दूसरी तरफ सिंधिया समर्थक नेता हरवीर रघुवंशी ने भी कलेक्टर से मांग की है कि फुल लॉकडाउन पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। आम आदमी व गरीब मजदूरों के बारे में भी सोचा जाए। इसके बजाय सोशल डिस्टेंसिंग से सभी मार्केट खोला जाए और कुछ गाइडलाइन बनाई जाए। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और परेशानियां कम होंगी। रघुवंशी ने कहा कि कुछ चिंहित दुकाने खुलने से कालाबाजारी भी बढ़ गई है और लोग परेशान हैं। इस टोटल लॉकडाउन के कारण छोटे कामगार मजदूरों के सामने परेशानी आ गई है।
बता दे कि शहर में इस समय सैकड़ों ऐसे मजदूर हैं जो प्रतिदिन काम तलाशते देखे जा सकते हैं। इनके सामने अपने परिवार के भरण पोषण का संकट है। कोरोना काल के बीच शिवपुरी में कई ऐसे कामगार श्रमिक हैं जिनकी नौकरी चली गई है यहां काम धंधा बंद हो गया। इसके अलावा कई ऐसे श्रमिक हैं जो बाहर से अपने गृह जिले में आए हैं और अब रोजगार नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा कोरोना बढ़ने के बाद एकाएक इन श्रमिकों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया और बाजार बंद करने का निर्णय ले लिया।
वहीं परेशान मजदूरों का कहना है कि यह बात सही है कि इस समय जिले में कोरोना पॉजिटिव बढ़ रहे हैं लेकिन प्रशासन को भी ऐसा रास्ता निकालना होगा कि लोगों की रोजी-रोटी व आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हो और कोरोना से बचाव भी किया जा सके। लोगों का कहना है कि पूरे देश में प्रतिदिन 25 हजार से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं लेकिन इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में आर्थिक गतिविधियां को बढ़ाने के लिए लॉक डाउन को हटाना पड़ा और इसके बाद अनलॉक फेस-1 और फेस-2 को बढ़ाया जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ें।
