मंदसौर। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ मंदसौर में भी गेंहू खरीदी की शुरुआत हो गई हैं। शुरूआती दौर में कम ही किसान अपनी उपज लेकर समर्थन मूल्य केंद्रों तक पहुंचे। इसका कारण यह है कि प्रशासन पहले छोटे किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर ले रहा है। साथ ही किसानों को एसएमएस या फ़ोन करके बुलाया जा रहा है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
दरअसल सरकार के आदेश पर भोपाल, इंदौर, उज्जैन को छोड़कर अन्य जगहों पर गेंहू उपार्जन केंद्रों की शुरुआत हो गई हैं। मन्दसौर जिले में गेंहू खरीदी के लिए 103 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। शुरुआती दौर में कम ही किसान अपने गेहूं की उपज लेकर समर्थन मूल्य केंद्रों तक पहुंचे।
हालांकि प्रशासनिक आदेश के चलते शुरुआत में छोटे किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर ली जा रही है। ऐसे में उपार्जन केंद्रों पर कम ही किसान अपनी उपज लेकर पहुंच पाए। इस दौरान कुछ किसानों को पंजीयन नही होने के कारण परेशानी का सामना भी करना पड़ा।
गेंहू लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचे किसान अनिल ने बताया कि वह ज्यादा गेंहू लेकर आया था लेकिन पंजीयन के हिसाब से उसका ढाई क्विंटल गेंहू ही लिया गया, बाकी फसल में उसका पंजीयन नही हो पाया था। प्रशासन के निर्देशों के चलते उपार्जन केंद्र तक एक पंजीयन धारी किसान और वाहन चालक को ही उपार्जन केंद्र तक जाने की अनुमति दी गई है। कोरोना वायरस के चलते जिले के कई उपार्जन केंद्रों पर किसान नहीं पहुंच पाए। उपार्जन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हाथ धोने और पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था की गई है। लेकिन प्रशासन की सख्ती और कोरोना डर की वजह से बहुत कम किसान अपनी उपज लेकर समर्थन मूल्य केंद्र तक पहुंचे। केंद्रों पर प्रशासन ने स्थानीय कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय के लिए पंजीयन धारी किसानों को एसएमएस और फोन कॉल के माध्यम से सूचित किया जा रहा है।
वहीँ किसान हरीश ने कहा कि मैं 20 किलोमीटर सफर कर गेंहू लेकर पंजीयन केंद्र पर आया हूँ। तोल चल रहा है। किसानों को बहुत परेशानी आ रही थी, सरकार का यह अच्छा फैसला है। दूसरे किसान अनिल ने बताया कि मोबाइल पर मैसेज आया था। इसके बाद में गेंहू लेकर आया हूँ। मेरी 28 बीघा की फसल है। लेकिन सबका पंजीयन नही हो पाया। यहां मेरा ढाई क्विंटल गेंहू ही लिया गया बाकी वापस ले जा रहा हूँ।
प्रबंधक वीरेन्द्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि आज शुरुआत है इसलिए किसान कम आए है। सरकार की मंशा है कि पहले छोटे किसानों की उपज ले ली जाए उसके बाद बड़े किसानों को मैसेज किया जाए।
