लेखिका सुश्री छवि गौड़ मुंबई में कार्यकारी निर्देशक हैं। वे दूरदर्शन के अलावा एक दशक से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
Xpose Today News
निर्माण से आप क्या समझते हैं? सीमेंट, सरिया, सड़कें और इमारतें? या फिर वह प्रक्रिया जिसमें जीवन सुरक्षित रहे, जल बचे, हवा शुद्ध रहे और आने वाली पीढ़ियां सांस ले सकें? जो विकास जीवन की शर्त पर खड़ा हो, वह विकास नहीं एक अस्थाई सुविधा है।
आज अरावली को काटने की जो बात सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है, वह केवल एक परियोजना नहीं,निर्माण की परिभाषा को ही उलट देने वाला निर्णय है।
अरावली कोई खाली जमीन नहीं यह इस भूभाग की रीढ़ है. अरावली को छूना केवल भूगोल से छेड़छाड़ नहीं यह जीवन की लय पर प्रहार है ।
जिस सरकार की ज़ुबान पर शास्त्र, धर्म और संस्कृति के शब्द सबसे अधिक रहते हैं, वही सरकार निजी स्वार्थ, तात्कालिक लाभ और सत्ता-सुविधा के सामने अचानक सारा ज्ञान भूल जाती है।
शास्त्र कहते हैं “प्रकृति रक्षति रक्षित:”
जो प्रकृति की रक्षा करता है, प्रकृति उसकी रक्षा करती है। पर यहां तो वही हाथ जो धर्म की बात करते हैं, जीवन के मूल स्त्रोत पर हमला कर रहें हैं।
मनुष्य और प्रकृति अलग नहीं हैं। जो बाहर नष्ट होता है,वही भीतर भी सूखता है। जिस समाज की चेतना सिकुड़ती है वो सबसे पहले प्रकृति से युद्ध करता है ।
क्या विकास वही है जो जीवन के स्रोतों को ही नष्ट कर दे?
क्या शास्त्र केवल भाषणों के लिए हैं, निर्णयों के लिए नहीं?
जब आने वाली पीढ़ियां पानी और हवा के लिए संघर्ष करेंगी, तो क्या यह निर्णय भी ‘विकास’ कहलाएगा?
अरावली को बचाना किसी विचारधारा का प्रश्न नहीं,यह हमारी सामूहिक चेतना की अंतिम परीक्षा है।
अब भी समय है निर्णय बदले जा सकते हैं।
पर यदि ज्ञान केवल भाषणों में रहा
और कर्म में स्वार्थ तो परिणाम हम सबके सामने होगा ।
