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महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त संदीप जी.आर. ने बुधवार को इंदौर में विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग का प्रत्येक अधिकारी अपने शासकीय दायित्वों के साथ-साथ कम से कम एक आंगनवाड़ी केंद्र को गोद लेकर उसे सर्वांगीण रूप से उन्नत और आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करे।
फील्ड स्टाफ की समस्याओं को सीधे सुना
बैठक का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा और मैदानी अमले की समस्याओं का निराकरण था। इसके लिए पहली बार बैठक में विभिन्न स्तरों के अधिकारियों के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रतिनिधि के तौर पर बुलाया गया था।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि कुपोषित बच्चों की देखभाल में वे लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन *पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप में दोहरी एंट्री* करनी पड़ती है। साथ ही पोषण ट्रैकर के *फेस रिकग्निशन सिस्टम में ज्यादा समय* लगता है। आयुक्त ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए जल्द व्यावहारिक समाधान का आश्वासन दिया।
बेहतर भवन और डिजिटाइजेशन पर जोर
बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्वच्छता, अधोसंरचना और रखरखाव पर विस्तृत चर्चा हुई। आयुक्त ने कहा कि जहाँ शासकीय भवन नहीं है, वहाँ बच्चों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और अनुकूल वातावरण वाले अच्छे किराए के भवनों का चयन किया जाए।
उन्होंने कार्यालयों में *कागज का उपयोग न्यूनतम करने और डिजिटाइजेशन* को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि आंगनवाड़ी से शाला पूर्व शिक्षा लेकर निकले युवाओं से संपर्क कर उन्हें केंद्रों के उन्नयन से जोड़ा जाए।
परियोजना अधिकारियों ने ‘आरंभ’ और ‘समस्या समाधान शिविर’ जैसी पहलों के लिए आयुक्त का आभार व्यक्त किया।
बाल संरक्षण संस्थाओं की प्रदर्शनी देखी
बैठक के बाद आयुक्त संदीप जी.आर. ने कलेक्ट्रेट परिसर में बाल संरक्षण संस्थाओं के बच्चों द्वारा बनाई गई दीपावली की साज-सज्जा सामग्री और कलात्मक दीपों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों की कलाकृतियों की सराहना कर उनका उत्साहवर्धन किया और प्रदर्शनी से सामग्री की खरीदारी भी की।
