झाबुआ। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले का एक गरीब किसान इन दिनों खुद बैल बनकर हल चलाने पर मजबूर है। किसान की पत्नी हल चलाने में उसकी मदद करती है। किसान के पास बैलों की जोड़ी नहीं हैं इसलिए वह खुद बैल बनकर हल चलाता है।
दरअसल मानसून पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी झाबुआ जिले में दस्तक दे चुका है। ऐसे में जिले के किसान खेतों में पसीना बहाने को तैयार है। लेकिन झाबुआ जिले के पेटलावद ब्लाक के ग्राम सारंगी में रहने वाले किसान महेश मालवीय को फसल उगाने के लिए बैल बनना पड़ रहा है। बैल की जोड़ी नहीं होने के कारण महेश खुद बैल बनकर हल हांकने पर मजबूर है। वहीं महेश की पत्नी इस काम में उसकी मदद करती है।
महेश का कहना है कि उसके पास बैल की जोड़ी नही है, इसलिए वह खुद ही हल हांकता है और पत्नि हल चलाने में मदद करती है। महेश का आरोप है कि उसे किसी सरकारी योजना का लाभ नही मिला है। वह मजदूरी कर अपने घर का गुज़ारा चलाता है। बारिश की आहट होने पर पुरखों से मिली जमीन के छोटे से टुकड़े पर खेती करता है।
यहीं नहीं महेश को अब तक न तो प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिला और न ही शौचालय बनाने के लिए पैसे मिले हैं। उसने खुद अपने खेत पर झोपड़ी बनाई है, लेकिन यह झोपड़ी भी बारिश में रहने लायक नहीं रहती। महेश की मजबूरी और सरकारी दावों को लेकर पेटलावद जनपद के अधिकारी मामले की जांच कर महेश को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाए जाने का दावा कर रहे है।
