उमरिया। प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने राम वनगमन मार्ग को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से उमरिया जिले के लोगों में ख़ासा उत्साह है। लोगों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। दरअसल उमरिया जिले में राम वनगमन समय के तीन मुख्य केंद्र है। ऐसे में लोगों में उपेक्षा का शिकार इन पवित्र स्थलों का कायाकल्प होने की उम्मीद जगी है।
विंध्य मैकल पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची अमरकंटक से निकलने वाली दो नदियों सोन एवं जोहिला के संगम स्थल पर स्थित दशरथ घाट लोगों की आस्था का केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चित्रकूट से सतना होते हुए भगवान राम उमरिया के मार्कण्डेय आश्रम पंहुचे थे। इसके बाद बांधवगढ़ किले में रात्रि विश्राम के बाद सोन एवं जोहिला के संगम स्थल पर अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था। तब से ही इस जगह को दशरथ घाट के नाम से जाना जाता है। यहाँ लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। हालाँकि अब तक यह पवित्र स्थल उपेक्षा का शिकार हो रहा था, लेकिन कमलनाथ सरकार के राम वनगमन मार्ग को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के फैसले से लोगों में उत्साह है। शायद अब इस स्थान का कायाकल्प हो सकेगा।
बता दे कि उमरिया जिले में राम वनगमन समय के तीन मुख्य केंद्र है। पहला है मार्कंडेय आश्रम जो बाणसागर जलाशय बन जाने के कारण डूब में आ चुका है। दूसरा है बांधवगढ़ का किला और तीसरा है दशरथ घाट संगम। लोगों का मानना है कि भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण को लंका में निगरानी रखने के लिए यह किला दान में दिया था। इसका निर्माण सेतु बन्धु रामेश्वरम का निर्माण करने वाले बंदर नल नील ने किया था। बांधवगढ़ के किले में स्थित राम जानकी मंदिर आज भी देश भर के लोगो की आस्था का केंद्र है जहां हर जन्माष्टमी लाखो लोग दर्शन करने आते हैं।
प्रदेश सरकार के द्वारा राम वनगमन मार्ग को चिन्हित कर विकसित करने से जिले में उपेक्षित पड़े राम वनगमन मार्ग के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार संभव हो सकेगा। वहीं लोगों के जेहन में धुंधली होती जा रही राम वन गमन की तस्वीर भी साफ होगी। देखना होगा सरकार अपने फैसले को कब तक अमल में ला पाती है।
