March 7, 2026

मेरे पास पावर है जितनी मर्जी होगी भुट्टे खाऊँगा।

लेखक मुकेश नेमा आबकारी विभाग में स्टेट फ्लाइंग ऑफ़िसर है।

Xpose Today News
तोता ही था वो । छाती फुलाए मेरी छाती पर मूँग दलता हुआ।उसने कनखियों से देखा मुझे ,अनदेखा किया और घर के पिछवाड़े जतन से लगाये मक्का के पौधों पर जहाँ तहाँ लटके भुट्टे के मीठे दानों का पूरे इत्मीनान से भोग लगाता रहा।

कोई शरीफ़ आदमी कब तक धीरज रख सकता है।मैंने नाराज़गी दिखाई अब। क्या हरकत है ये ?

उसने अब भी कोई नोटिस लिया नहीं मेरा और पहले की तरह भुट्टे में चोंच मारने में व्यस्त बना रहा।

समझ में नहीं आ रही मेरी बात ? 

अच्छा ! उसने सर घुमाया तनिक सा । मुझसे बात कर रहे हो ?

और कौन है यहाँ हम दोनों के अलावा ?

ठीक है ! क्या कष्ट है तुम्हें ?

हद है यार ।चोरी और सीनाज़ोरी । मेरी खून पसीने से सींचीं खेती उजाड़ रहे हो और मुझसे पूछ रहे हो मुझे क्या कष्ट है । 

तुम भी खा लेना भुट्टे । मैंने कब रोका है तुम्हें ?

तुम क्यों रोकोगे मुझे ? तुम हो कौन ?

मैं स्वतंत्र देश का स्वतंत्र तोता हूँ । मैं तुम्हारे किसी काम के आड़े नही आ रहा ,इसी तरह तुम भी मुझे मेरे मन की करने से नहीं रोक सकते। 

कुतर्क है ये। स्वतंत्र होने का यह मतलब नहीं कि तुम हर जगह मुँह मार सकते हो। 

रेल में सफ़र करते हो ना ?

हाँ करता हूँ ! पर भुट्टे के खेत में ये ट्रेन कहाँ से घुसेड़ दी तुमने ?

तोते ने ध्यान देना ज़रूरी नहीं समझा इस सवाल पर । रेल्वे स्टेशन पर लिखा होता है ना भारतीय रेल्वे आपकी अपनी संपत्ति है ? 

हाँ तो ?

समझो यार। सार्वजनिक चीज़ सबकी होती है। उसे कोई भी खा पचा सकता है।उसका कोई नहीं होता पर वो सबकी होती है। कोई एक दावा नहीं कर सकता उस पर ।

ये तो बेतुका उदाहरण है । ये ज़मीन ये खेत मेरा है ।इसमें लगाई फसल भी मेरी ही हुई फिर। 

ये खेत तुम साथ लेकर पैदा हुए थे ?

क्या मतलब है इस बात का ? 

खेत तुम्हारे पहले ही यहीं मौजूद था। तुम्हारे मर जाने के बाद भी ये यही बना रहेगा। इस पर तुम्हारी कैसी दावेदारी ? गीता पढ़ो । तुम नश्वर हो और भुट्टे का यह खेत अमर है। 

पर तुम मेरी मेहनत की फसल कैसे खा सकते हो ?

हँसा अब तोता। मेहनत जैसी बात मुझसे तो कर ली और किसी से मत करना।

मतलब ?

मतलब ये कि ऐसी बात करने वाले बेवकूफ माने जाते हैं अपने यहाँ। जितने भी लोग मज़े मार रहे है हिंदुस्तान में ,उसमें पसीना बहाने वाले कितने है ? तोता एकाएक दार्शनिक हो गया। जो भी तर माल उड़ा रहे हैं वो दूसरों का पकाया हुआ है। किसान और मज़दूर की क़िस्मत में भूखा रहना लिखा है। क़िस्मत से लड़ कर कौन जीत सका है अब तक। तुम्हें भी इस निरर्थक कोशिश से बचना चाहिए। 

पर ये भुट्टे उगाये है मैंने। 

ग़लतफ़हमी तुम्हारी। ये भुट्टे तुमने नही उगाये ,खुद उगे है ये। करिश्मा कुदरत का। इन्हें अकेले खाने की तुम्हारी इच्छा अप्राकृतिक और अन्यायपूर्ण है। समाजवाद को आदर्श मानना चाहिए तुम्हें। मिल बाँट कर खाना सीखो। इससे संतोष मिलेगा तुम्हें । तुमने सुना नहीं ,जब आवे संतोष धन ,सब धन धूरि समान। 

मैं शरीफ़ आदमी हूँ । तुमसे बेमतलब बहस नहीं करना चाहता मैं।

हँसा अब तोता। उड़ कर और ऊँची फुनगी पर सवार हुआ वो। तुम हरगिज़ शरीफ़ नहीं ,जो बहस नहीं कर सकता ,शरीफ़ होने का चोला ओढना मजबूरी है उसकी । वैसे भी खुद को शरीफ़ मानना ,अपने आप को गधा मानने जैसी बात है। गधों को भुट्टे खाते देखा है कभी ?

तुम बदतमीज़ हो रहे हो। मैं चाहता हूँ मेरे भुट्टों से दूर रहो बस। 

यदि ऐसा न करूँ मैं तो ? 

धर्म संकट की बात थी ये तो मेरे लिये। क्या जवाब दिया जाए इस मुँह फट तोते को ? 

तुम कुछ नहीं कर सकते। व्यंग्य से मुस्कुराया फिर मैं अकेला नही । मेरी जाति ,पूरा समाज गोलबंद है मेरे पीछे। लोकतंत्र है इस देश में। पॉवर मेरे पास है। पॉवर मुझे समर्थ बनाता है। समर्थ को कोई दोष नहीं लगता। जितना मर्ज़ी हो खाऊँगा मैं और जितना चाहूँगा उतना उजाड़ूँगा। तुम कुछ नही उखाड़ सकते मेरा।

पर इंसानियत भी तो कोई चीज़ होती है । मैंने खुद महसूस किया कि मेरी आवाज़ में ज़्यादा दम नहीं है। 

ज़ोर से हँसा तोता। हँसते हँसते आँखों से आँसू आ गए उसके। इंसानियत की वो बात करते हैं जो कमजोर होते है। तुम कमज़ोर हो और मैं वीर हूँ । शास्त्रों में कहा गया है कि वीर भोग्या वसुंधरा। इसलिए भी मेरा तुम्हारे लगाये भुट्टे खाना शास्त्रोक्त कार्यवाही है। 

लाजवाब हुआ मैं ।तोता वाक़ई वीर था।समर्थ था।समर्थ था इसलिये नीतिशास्त्र ,समाजशास्त्र,अध्यात्म ,राजनीति ,विज्ञान सब उसकी जेब में थे। मज़बूत पंख और तीखी चोंच हैसियत की वजह थी उसकी। दबंग और पॉवर फ़ुल था वो , बाप दादों की दी गई सीख याद आई अब मुझे ।पॉवर फ़ुल बंदे से लड़ना दीवार से सर टकराने जैसी हरकत मानी जाती है। 

मैंने अपने सर की रक्षा करना ठीक समझा अब । ताज़ा खबर यह कि अब मैं असहाय जनता की तरह चुप हूँ और तोता मय रिश्तेदारों के भुट्टो का भोग लगा रहा है। 

मुकेश नेमा

Written by XT Correspondent

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