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नीरज याग्निक इंदौर शहर में जिन्हें परिचय की जरूरत नहीं। ज़िद,जोश, जुनून और जज़्बा यानि नीरज। फिटनेस की बात होगी वहां नीरज याग्निक का नाम, जहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक सायकल से जो निकल पड़े। भारत का झंडा लिए कश्मीर के लाल चौक पर जो जाकर भारत का झंडा फहरा दे वह नीरज।
नवरात्रि में युवाओं के साथ लोकप्रिय सर्वश्रेष्ठ जिसे किसी “अभिव्यक्ति” की ज़रूरत नहीं क्योंकी माँ की भक्ति का सैलाब ही ऐसा है साकेत नगर के गरबे में। वहाँ शक्ति साधना के आयोजक हैं नीरज।
पलासिया चौराहा माफ कीजिए अब “सनातन चौराहा।” जहां रामधुन पर भक्ति में डूबे युवाओं का प्रतिनिधित्व करते जो इंसान नज़र आ जाए, वही है नीरज याग्निक। युवाओं को नशे के विरुध्द का महत्व बता कर उन्हें शरीर सौष्ठव के प्रति उत्साहित करना, असंभव के विरुध्द डट कर सामना करना। यह सारे बहुचर्चित इनके गुण है।
एक नीरज याग्निक लक्ष्मण के रूप में भी
अब तक जितनी जानकारियाँ आपको नीरज जी के विषय में है वह बहुत थोड़ी हैं आईए विराट व्यक्तित्व को जानिए। अब तक केवल रामायण में राम लक्ष्मण की जोड़ी प्रेम, समर्पण, आदर, वचन का पक्का सुना है लेकिन यह सब कुछ इस दौर में भी है।आप जानते होगें जिस तरह भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्मण थे।पिता तुल्य भाई के साथ ठंड,गर्मी,बरसात,तूफ़ान में हर रण में डटे रहे। वैसे ही नीरज बड़े भाईं कल्पेश याग्निक के सिध्दांतों का पालन करते हुए लक्ष्मण की तरह एक तपस्या, एक दृढ़ संकल्प, जुनून, धैर्य के साथ एक अजेय योद्धा के रूप मे।
2018 से एक लक्ष्मण का अपने राम के लिए युद्ध
2018 में कल्पेश जी की मृत्यु के बाद नीरज अपने भाई के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हुए सच्चाई की लड़ाई शिद्दत से लड़ते रहे। लक्ष्य केवल एक ही दोषियों को सजा दिलवाने विशुद्ध रूप से क़ानूनी तरीके से। पवित्र उद्देश्य से किए काम मे ईश्वर भी मदद करता है। 2025 में नीरज के प्रयासों से ही उजागर हो सका की आरोपियों ने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों से ज़मानत हासिल कर न्यायपालिका को धोखा देने की असफल कोशिश की। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था दिवंगत कल्पेश जी का एक लक्ष्मण रूपी भाई है जो पूरे प्रकरण पर निगाह बनाए हुए है। जो सच्चाई से भाई के सम्मान की लड़ाई लड रहा है। वह ऐसा नहीं होने देगा। नतीजा आरोपी फिर सलाख़ों के पीछे।
क़ानून पर है अडिग भरोसा हार नहीं मानूँगा।
कल्पेश जी की मौत के ज़िम्मेदारों पर क़ानून का शिकंजा कसता जा रहा है। इसके पीछे नीरज का अथक परिश्रम, संघर्ष ही है। खुद के अंदर के दर्द को ताक़त बनाकर जुटे रहना। जब तक की लक्ष्य प्राप्त न हो। क्योंकि वे कहते कल्पेश् भाई कहते थे मैं क़ानूनी ही काम करता हूँ क़ानून पर मुझे पूरा भरोसा है जीत सच की ही होगी। आसमान से काले बादल हटेंगें और सच रूपी सूरज की चमक चारों तरफ बिखरेगी। वैसा ही हो रहा है। एक भाई का दिवंगत पिता तुल्य बड़े भाई के लिए आदर, सम्मान, समर्पण, जीतने की ज़िद,जज़्बा, यह है नीरज याग्निक।
