रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले का पुतलीकरार गांव अपने शैलाश्रय के कारण जाना जाता है। यहां के शैलाश्रय में डायनासोर और विचित्र आकृति के मानवों के चित्र मिलते हैं। कुछ स्थानों पर एलियन जैसे विचित्र आकृति के मानव चित्र भी मिले हैं। शैलचित्रों की शैली से इनका आदिकाल ऐतिहासिक एवं मध्यकाल के बने होना प्रतीत होता है। समय-समय पुतलीकरार को अच्छे से पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग उठती रही हैं। ताकि जिले की इस अमूल्य धरोहर से अन्य लोग भी रूबरू हो सके।
बता दे कि पुतलीकरार में अब तक 50 से अधिक शैलाश्रयों को देखा जा चुका है। यहां लगभग 100 फीट लंबी और 30 फीट ऊंची दो मंजिला शैलाश्रय भी है। इसे जिले का सबसे बड़ा शैलाश्रय भी कहा जाता हैं। इन शैलाश्रयों में डायनासोर का चित्र और एलियन जैसी विचित्र आकृति के मानव चित्रों के साथ ही कई तरह के चित्र देखने को मिलते हैं।
इन शैलाश्रयों की सबसे अधिक खासियत यह हैं कि इनमें छह रंगों का उपयोग किया गया हैं, जबकि सामान्यतः शैलाश्रयों में गेरुए और सफेद रंग का उपयोग किया जाता है। यहां के एक शैलाश्रय में डायनासोर का चित्र भी देखने को मिलता है। जिससे पता लगता हैं कि इस क्षेत्र में कभी डायनासोर हुआ करता था।
इसके अलावा यहां मानव की जीवन शैली के चित्र भी देखने को मिलते हैं। जैसे किसी जानवर का शिकार करने के बाद उसे ले जाना, उसे पकाना और सामूहिक नृत्य करना। कहीं-कहीं कांधे पर कांवड़ पर वजन ले जाते चित्र भी दिखाई देते हैं। लोगों का मानना है कि पुतलीकरार को एक अच्छे से पर्यटन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
