May 15, 2026

सतपुड़ा की पहाड़ियों में नजर आए दुर्लभ जीव

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा वनमंडल में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच कालीभीत के जंगलों में हाल ही में उड़न गिलहरी, चिंकारा व चौसिंगा जैसे दुर्लभ जीव नजर आए हैं। उड़ने वाली गिलहरी देश के अन्य जंगलों और अभयारण्यों में कम ही बची है। वहीँ चौसिंगा को भारत सरकार ने 1972 में संरक्षित प्रजाति में बाघ का दर्जा दिया था। इसके अलावा चिंकारा और चौसिंगा का एक ही जंगल में पाया जाना भी अपने आप में बहुत ही दुर्लभ है।

मध्य प्रदेश के खंडवा वनमंडल में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच कालीभीत के जंगलों में वनस्पति और जड़ी बूटियों का खजाना है। इस जंगल में कई तरह के दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणी और पक्षी भी रहते है। वन्य प्राणियों की गतिविधियों और सुरक्षा के लिए जंगल में नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं। इसके लिए जंगल में दस ऐसे स्थानों का चयन किया गया जहाँ पूरे साल पानी रहता हैं और वन्य जीव वहां पानी पीने आते हैं। हाल ही में इन कैमरों में उड़न गिलहरी, चिंकारा व चौसिंगा जैसे दुर्लभ प्राणी कैद हुए हैं। इन दुर्लभ प्राणियों के अलावा इस जंगल में चीता, तेंदुआ, नीलगाय, भालू सहित विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और मांसाहारी वन्य प्राणी, पशु व पक्षी मौजूद हैं।

बता दे कि चौसिंगा, भारत और नेपाल के अलावा पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं पाया जाता है। नेपाल भी इसकी संख्या काफी कम है। ऐसे में भारत सरकार ने 1972 में इसे बाघ का दर्जा दिया था। चौसिंगा पहाड़ों या पथरीली जगह पर रहना पसंद करता हैं ताकि बड़े जानकारों के हमले से बचने के लिए पत्थरों में छिप सके।

Written by XT Correspondent

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