May 17, 2026

कभी ईंट उठाकर मजदूरी करने वाली शन्नो अब ख़ुद बनी मिस्त्री

आगर-मालवा। मध्य प्रदेश के आगर जिले के कानड में रहने वाली उम्रदराज शन्नो बी उन लाखों महिलाओं के सामने मिसाल हैं, जो जिंदगी में आई मुसीबतों से हार मान लेती है। कभी अपने सिर पर ईंटों का बोझ उठाकर मजदूरी करने वाली शन्नो बी आज एक कुशल राजमिस्त्री बन लोगों के आशियाने बना रही है। क्षेत्र के लोग भी शन्नो बी के हुनर की तारीफ करते नहीं थकते।

बता दे कि शन्नो बी ने अपनी ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन अपनी मेहनत और सूझबूझ से शन्नो बी ने अपने जीवन को एक नई दिशा दी है। दो बेटियों की मां शन्नो बी को साल 2004 में उनके शौहर ने तलाक दे दिया था। ऐसे में खुद की और दोनों बेटियों की जिम्मेदारी शन्नो बी पर आ पड़ी।

बेटियों के पालन-पोषण के लिए शन्नो बी ने मज़दूरी करना शुरू कर दिया। वह हर दिन सुबह से शाम तक ईंटों की तगारी का बोझ उठाकर अपने परिवार का पेट पालती थी। हालांकि मजदूरी करते समय शन्नो बी अक्सर राजमिस्त्री की बारीकियों को गौर से देखती रहती थी। धीरे-धीरे शन्नो बी ने खुद ही ही ईंटें जोड़ना सीख लिया। अब शन्नो बी खुद ही राजमिस्त्री बनकर कानड और आसपास के इलाकों में घरों की दीवारें चुनती नज़र आती हैं।

अपने इस हुनर से शन्नो बी काफी खुश है। इस काम में शन्नो बी को मजदूरी के मुकाबले ज्यादा पैसा मिलता है। इससे वह ना सिर्फ़ अपना और बेटियों का पेट ही पालती है बल्कि उन्हें पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहती है। शन्नो बी की बड़ी बेटी आयफा बारहवीं और छोटी बेटी सिमरन नौवीं कक्षा में पढ़ती हैं। शन्नो बताती है कि उसे इस काम के बाद इज्जत पहले से ज़्यादा मिलती है। पहले लोग उसे शन्नो कहकर बुलाते थे। अब शन्नो बहन कहकर बुलाते हैं। अब शन्नो मकान की दीवारों से लेकर छतों तक भर लेती है। शन्नो की ये कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपनी ज़िंदगी से संघर्ष कर रही है।

Written by XT Correspondent

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