लेखक कमल गुप्ता जाने माने एडव्होकेट, समाजसेवी, चिंतक विचारक है।
स्मृति शेष
इन्दौर अभिभाषक संघ एवं हाईकोर्ट अभिभाषक संघ इंदौर के पूर्व अध्यक्ष हमारे वरिष्ठ अभिभाषक आदरणीय पद्माकर जी शुक्ला जो पी. के. शुक्ला जी के नाम से जाने जाते थे । आपका जन्म सोनकच्छ जिला देवास के विख्यात वैद्यराज पं गदाधराचार्य जी के घर हुआ था। आपने वकालत की शुरूवात इंदौर के वरिष्ठ अभिभाषक स्व: लक्ष्मी शंकर जी शुक्ला सा. के आफिस में जूनियरशीप कर की।आप एक कुशल, सफल एवं प्रतिष्ठित अभिभाषक थे।
एसपी से एयरपोर्ट पर वकीलों का हुआ विवाद मुख्यमंत्री के पास पहुंचे फिर ऐसे हुआ विवाद ख़त्म।
एक बार तात्कालीन मुख्यमंत्री श्री मोतीलालजी वोरा से बार का प्रतिनिधि मंडल एयरपोर्ट पर मिलने गया वहा पर तत्कालीन एस. पी . सा.रामलाल वर्मा से विवाद होगया था,कुछ ज्यादा ही कहा सुनी हो गई थी।शुक्लाजी एस. पी सा.से चिढ़ गये थे और बोले इसको छोडूगा नही । एयरपोर्ट से लोटते ही नईदुनिया के भोपाल ब्यरो चीफ श्री अनिल त्रिवेदी जी को फोन कर कहा तत्काल सी. एम. सा. से मिलना है,अपायमेन्ट करवाओ, दूसरे ही दिन सुबह 10-30 बजे वल्लभ भवन भोपाल में मिलने का समय तय होगया। शुक्लाजी, बार सचिव आर. के. मोदी, गजेन्द्र यादव और मै,मेरी कार से भोपाल गये ।एस.पी. सा.के खिलाफ दुर्व्यवहार के ज्ञापन दिया। वोरा जी ने हमारे सामने एस .पी. सा.की फोन पर खिचाई की और नोटशीट पर आदेश जारी करवाया, बाद में एस.पी. सा.ने शुक्लाजी से माफी मागी।
उन्हें लगा कमल गुप्ता अड़ंगा डालेगा लेकिन मुझे गले से लगा लिया।
अभिभाषक संघ के मेरे कार्यकाल से पहले शुक्ला जी के कार्यकाल का आडिट समय पर नही हुआ था, आडिट रिपोर्ट मेरे कार्यकाल मे आई थी,कुछ दिन पूर्व ही मेरी शुक्लाजी से किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई थी।शुक्लाजी और उनके साथियो को लगा की कमल गुप्ता आडिट रिपोर्ट मे अडंगा लगायेगा और आडिट पास नही होने देगा।साधारण सभा मे आडिट पेश हुआ मैने सभा मे इस उद्बोधन के साथ आडिट रखा कि शुक्लाजी संघ हित मे कुछ रूपये ज्यादा खर्च कर सकते है मगर वे संघ की राशी का दुरूपयोग कतई नही कर सकते और तीन मिनिट मे आडिट पास करवा दिया।शुक्लाजी देवास मे चला रहे केस को जल्दी,जल्दी निपटा कर सभा मे पहुचे तब तक आडिट पास हो चुका था।शुक्लाजी ने सभा समाप्त होते ही मुझे गले लगा लिया।
रसगुल्ले के शौकिन थे शुक्ला जी
वैसे तो शुक्लाजी के जीवन से जुड़े कई किस्से है,जिन सबको एक बार में बताना सम्भव नही है। वे मीठा खाना पसंद करते थे ,उन्हे गीता भवन के पास रसगुल्लै वाले के रसगुल्लै बेहद पसंद थे,एक आघा किलो रसगुल्लै खाना उनके लिये मामूली बात थी।वे बातो के जादूगर थे।सदा हसकर बाते करते थे।बड़े से बड़े अधिकारी से अपनी बात मनवा लेते धे।
गुरु परिवार से थे।
मेरा ननिहाल सोनकच्छ के नगर सेठ मथुरालाल जी के यहाँ है। शुक्लाजी मेरे मामा सेठ भगवानदास जी के अभिन्न मित्र होने व उनके परिवार से घनिष्ठता के कारण मै उन्हे मै मेरे बचपन से जानता हू और इसी वजह से मैने हमेशा मामाजी कहकर ही उन्है सम्बोधित किया।वे मेरे सीनियर स्व: एस. एल. उकास सा. के सीनियर लक्ष्मी शांकर जी शुक्ला के ऑफिस से होने के कारण गुरू परिवार से थे।
एक समय था जब अभिभाषक संघ शुक्लाजी के नाम से जाना जाता था। उन्होने अपने कार्यो से, जिसकी लम्बी फेहरिस्त है, इन्दौर अभिभाषक संघ को अविस्मरणीय उंचाईया दिलाई। वर्ष 1996-97 में जब मैं इंदौर अभिभाषक संघ का अध्यक्ष चुना गया तब मेरा सौभाग्य था कि मैंने कार्यभार अर्थात चार्ज मामाजी पी. के. शुक्लाजी से उत्तराधिकारी के रूप में ग्रहण किया था।
अभिभाषक संघ के अनेको बार पदाधिकारी चुने गये,उनके कार्यकाल मे अभिभाषक संघ की कार्यकारिणी में कभी विवाद नही हुवे।अभिभाषक संघ की मैग्जीन उनके कार्यो से भरी पड़ी रहती धी। अखबार मे भी लगातार अभिभाषक संघ की खबर के साथ फोटो छयते रहते धे। उनके सम्बंध सीनियर, जूनियर व समकालीन अभिभाषको के साथ सदैव मधुर रहते थे। शुक्लाजी अभिभाषक संघ के ऐसे नेता थे जिन्हे हर राजनैतिक पार्टी अपना मानते थी मगर उन्होने किसी पार्टी का कोई पद ग्रहण नहीं किया।
पी .के .शुक्ला सा एक अजीम शख्सियत के मालिक थे। वे अभिभाषक संघ की धरोहर थे।उनके जीवन के कई खट्टे मीठे किस्से है। अभिभाषको एवं अभिभाषक संघ ने अपना ऐसा हितेषी नेता खो दिया जो जीवन पर्यन्त वकालात और अभिभाषको के लिये जिया। मामाजी अदरणीय पी. के. शुक्लाजी के चरणो में शत शत नमन, ओम शान्ति शान्ति।
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