रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम खजाना देखने को मिलता है। यह क्षेत्र अनोखे शैलचित्रों के लिए जाना जाता है। खासकर जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र के अंर्तगत आने वाले आदिवासी ग्राम भरतीपुर घना और शंकरगढ़ की पहाड़ियों पर शैलचित्रों का भंडार हैं। यहां की रहस्यमयी गुफाएं और उनमें बने शैलचित्र अपने आप में अनोखे हैं।
दरअसल रायसेन जिले का भीमबेटिका आदिमानवों की आश्रय स्थली के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां करीब 600 गुफाएं हैं। इसे यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल में शुमार किया है। इनमें से कुछ गुफाओं में उकेरे हुए चित्र कई युगों पुराने हैं। दरअसल जिले में बड़ी संख्या में ऐसे स्थान हैं जहां बरसों तक आदिमानव रहे। उस समय आदिमानवों द्वारा प्राकृतिक बड़े पत्थरों पर चित्र उकेरे जाते थे। इन्हें ही शैलचित्र कहा जाता है।
भीमबेटिका के अलावा जिले में भरतीपुर घना और शंकरगढ़ की पहाड़ियों पर भी बड़ी संख्या में शैलचित्र देखे जा सकते हैं। शंकरगढ़ की रहस्मयी गुफाओं में दुर्लभ शैलचित्र बने हुए हैं। आदिमानवों द्वारा बनाए गए शैलचित्रों में विभिन्न सामुदायिक गतिविधियां जैसे- जन्म, मरण, धार्मिक अनुष्ठान, नृत्य, शिकार खेलना या आखेट दृष्य, जानवरों की लड़ाइयां और आमोद-प्रमोद को इन चित्रों में स्थान दिया गया है। साथ ही जानवरों को भी शैलचित्रों में स्थान दिया गया है। ख़ास बात यह है कि इन चित्रों में जो रंग भरे हुए थे, वह सालों बाद भी वैसे ही बने हुए हैं।
