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सड़क पर एक्सीडेंट चारों तरफ बिखरा खून, बदहवास पड़ा घायल और आसपास तमाशा बनी भीड। स्थान था जावरा रतलाम रोड। तभी पुलिस की गाड़ी गुज़रती है। गाड़ी में बैठे आईपीएस ड्राइवर को गाड़ी रोकने का कहते हैं।ड्राइवर गाड़ी रोकता है आईपीएस गाड़ी से उतर कर दौड़ कर घायल के पास पहुंचते हैं। उसे तुरंत अपनी सरकारी इनोवा में बैठाकर हॉस्पिटल के लिए रवाना करते हैं। यह हैं रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल।
जावरा से रतलाम की ओर जा रहे डीआईजी निमिष अग्रवाल का काफिला निकला। सड़क पर तड़पते घायल पर नजर पड़ते ही उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाने के निर्देश दिए और खुद मौके पर पहुंच गए। घाव की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी ने एंबुलेंस का इंतजार करके समय बर्बाद करना सही नहीं समझा। उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई और अपने ड्राइवर व गनमैन को निर्देश दिया कि घायल भेरुलाल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाए। डीआईजी ने बिना किसी झिझक के अपनी सरकारी कार में घायल को बिठाया और तुरंत रतलाम मेडिकल कॉलेज भिजवाया, ताकि सही समय पर डॉक्टरी इलाज मिल सके।
खुद बुलेट पर लिफ्ट लेकर रतलाम के लिए निकले
इस पूरी घटना का सबसे खास और मानवीय पहलू तब सामने आया जब घायल को लेकर डीआईजी की कार रवाना हो गई। अब अधिकारी के पास रतलाम पहुंचने के लिए कोई गाड़ी नहीं थी। दूसरी सरकारी गाड़ी मंगवाने या प्रोटोकॉल का इंतजार करने के बजाय, डीआईजी अग्रवाल ने साधारण नागरिक की तरह सड़क पर ही मदद ली।
मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया
सड़क पर घायल को देखा अपनी गाड़ी से उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया है।
निमिष अग्रवाल, डीआईजी रतलाम।
