May 4, 2026

उप चुनाव में कांग्रेस की जीत तय, बीजेपी को हो रहा है बड़ा नुक़सान।

एक्सपोज़ टुडे, इंदौर।
मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है वहीं बीजेपी में चल रही अंदरूनी खिंचतान और सिंधिया खेमे समर्थक उम्मीदवारों के बढ़ते विरोध से पार्टी को हार का अंदेशा लग चुका है। बीजेपी के अंदरखाने में यहाँ तक चर्चा है की सिंधिया के आने से बीजेपी को नुक़सान हुआ है।एक्सपोज़ टुडे ने ग्राउंड लेवल पर सर्वे कराया तो कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं।

3 नवंबर को होने वाली वोटिंग से पहले ही बीजेपी को हार का डर सताने लगा है । हार का सबसे बड़ा फ़ैक्टर सिंधिया समर्थक उम्मीदवार हैं जिनका बड़े पैमाने पर जनता विरोध कर रही है । एक्सपोज़ टुडे ने ग्राउंड लेवल पर सर्वे कराया तो सभी जगह ग़द्दार और 35 करोड़ में बिकने की बात से मतदाता नाराज़ है और बीजेपी उम्मीदवार कमजोर हैं ।मालवा विमाड की सात सीट हो या सिंघिया का गढ़ ग्वालियर सभी जगह चुनौती है।

मालवा निमाड

सांवेर

सांवेर विधानसभा सीट सिंधिया की नाक का सवाल बन गई है। यहाँ पर सिंधिया का समर्थक तुलसी राम सिलावट मैदान में है ।

राजनीतिक समीकरण
सिलावट के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानिय नेता हैं।सांवेर से बरसों से बीजेपी के कार्यकर्ता सिलावट को जीता कर विधानसभा में भेजें यह संभव नहीं ।

विकास
15 साल बीजेपी की सरकार में सांवेर में मूलभूत सुविधाएँ ही नहीं है। गाँवों में सड़क पानी बिजली जैसी समस्याएँ है। शहरी क्षेत्र का बहुत सा हिस्सा सांवेर में जुड़ जाने के बाद भी विकास नहीं हुआ है ।

जातिगत समीकरण
सांवेर में राजपूत समाज के 50 हज़ार वोट हैं। सभी बीजेपी से वादाखिलाफी के मुद्दे पर नाराज़ है।यह नाराज़गी भारी पड़ सकती है।

बदनावर
बदनावर में सिंधिया समर्थक राज्यवर्द्धन दत्तीगांव मैदान में हैं। दत्तीगांव के सामने कांग्रेस प्रत्याशी कमल सिंह पटेल हैं। कमल सिंह बीजेपी के राज्यवर्द्धन दत्तीगांव को टक्कर दे रहे हैं।

जातिगत समीकरण
यहाँ राजपूत बाहुल्य सीट होने से राजपूत वोट अहम भूमिका में है। कमल सिंह कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी के राज्यवर्द्धन दत्तीगांव को टक्कर दे रहे हैं।

सूखा समस्या
किसान परेशान है फसलें नहीं है पंद्रह सालों से खेतों में पानी नहीं था। नर्मदा का पानी यहाँ कांग्रेस की सरकार में आया है। इसलिए लोगों का झुकाव कांग्रेस की तरफ़ है।

हाट पिपलिया
हाट पिपलिया सीट पर बीजेपी के क़द्दावर नेता और पूर्व मंत्री दीपक जोशी जीतते रहे हैं । यहाँ कांग्रेस से बीजेपी में आए मनोज चौधरी उम्मीदवार हैं। चौधरी ख़ाती समाज के वोट पर निर्भर होकर चुनाव जीतना चाहते हैं । लेकिन हालत ख़राब है ।

राजनीतिक समीकरण

राजनीतिक समीकरण यहाँ के बिगड़ चुके हैं क्योंकि दीपक जोशी की नाराज़गी भारी पड़ रही है । जोशी के भाई मनोज निर्दलीय चुनाव में खड़े होकर चुनौती बनकर उभर रहे हैं।

विकास
हाट पिपलिया में विकास नहीं हुआ है बायपास से सटे गाँवों में सड़क नहीं है पिछले दस साल में हाट पिपलिया को देवास और इंदौर से जोड़ने वाली सड़क नहीं बनी है। पुल पुलिया तक जीर्ण शीर्ण है।

जातिगत समीकरण
हाट पिपलिया में जातिगत समीकरण हैं। यहां खाती समाज के वोट ज़्यादा हैं लेकिन मुस्लिम, ब्राह्मण, राजपूत भी है ।

नेपा नगर
नेपा नगर में भाजपा प्रत्याशी सुषमा कासडेकर को आदिवासीयों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। नेपा नगर में बीजेपी के पुराने नेता कांग्रेस से आई इस नेत्री को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं ।

मंधाता
मंधाता से बीजेपी प्रत्याशी नारायण पटेल कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए । पटेल का भारी विरोध है उनके ख़िलाफ़ नारे लग चुके हैं ग़द्दार वापस जाओ वापस जाओ । न तो बीजेपी में उन्हें स्वीकारा जा रहा है न वो खुद मन से बीजेपी को अपना मान पा रहे हैं।
महिलाओं ने तो यहाँ तक कह दिया था की शर्म नहीं आती यहाँ मुँह उठा कर आ गए ।

सुवासरा
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए मंत्री हरदीप सिंह डंग को ख़ासे विरोध का सामना करना पड रहा है। जनता ने उन्हें नकार दिया है डंग जहां सभा लेने जाते हैं वहाँ जय जय कमलनाथ के नारे लग जाते हैं । पिछले दिनों किसानों ने डंग से पूछा था 7 माह हो गए बीजेपी में आए आपने किसानों के लिए क्या किया ?

आगर मालवा
आगर मालवा में कांग्रेस के विपीन वानखेड़े बीजेपी प्रत्याशी बँटी उंटवाल पर भारी पड रहे हैं यहाँ जातिगत आधार है लेकिन उम्मीदवार का चेहरा भी है विपीन वानखेड़े चुनाव हारने के बाद जाना पहचाना चेहरा हैं क्योंकि वे लगातार सक्रिय रहे और टक्कर भी दे रहे हैं यहाँ भी बीजेपी की राह आसान नहीं है।

Written by XT Correspondent

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