भोपाल। मध्यप्रदेश का किसान इस समय संकट में है। किसानों की कर्ज माफी का वादा कांग्रेस पूरा नहीं कर पाई और अब दूसरी ओर प्रदेश में अत्यधिक बारिश के बाद खरीफ सीजन की फसलें चौपट हो गई हैं। मध्य प्रदेश में प्रारंभिक आकलन के अनुसार अतिवृष्टि से लगभग 10 हजार करोड़ की बर्बादी की रिपोर्ट सामने आई है। मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों में अतिवृष्टि से खराब हुईं फसलों को लेकर किसानों को मदद की दरकार है। बजट संकट से जूझ रही कमलनाथ सरकार क्या इस संकट की घड़ी में किसानों की मदद कर पाएगी? यह सबसे बड़ा सवाल है। अब कमलनाथ सरकार ने केंद्र से मदद की गुहार लगाई है। 10 हजार करोड़ की मदद के लिए कमलनाथ सरकार ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने कमलनाथ सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए किसानों के लिए जल्द से जल्द मदद देने की बात कही है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान तो अतिवृष्टि से प्रभावित जिलों के दौरे पर निकल चुके हैं और बारिश से प्रभावित लोगों किसानों से मिल रहे हैं। किसानों से मिलने के बाद शिवराज ने तो कमलनाथ सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि खराब फसलों का तत्काल सर्वे हो और राहत राशि बांटने का काम प्रदेश सरकार करे।
किसानों के नाम पर मौका भुनाने में जुटे राजनीतिक दल
किसानों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच शुरू इस सियासत के बीच परेशानी यह है कि वास्तव में किसानों को मदद मिल पाएगी। प्रदेश में गरमाई इस राजनीति के बीच किसानों के वोट बैंक को लेकर दोनों ही दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच होना यह चाहिए कि अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए तत्काल सर्वे हो। राहत राशि की व्यवस्था हो, केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर किसानों की मदद के लिए आगे आएं। अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाए, जिससे तत्काल किसानों को मदद मिल सके लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं लेकिन इससे प्रभावित किसानों का भला होने वाला नहीं।
16 लाख किसानों को आज भी कर्ज माफी का इंतजार
जिन किसानों के कारण कमलनाथ मप्र के मुख्यमंत्री बने उन किसानों के वादे को ही वह पूरा नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को आए नौ महीने हो गए लेकिन किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा जस का तस है। कमलनाथ सरकार ने लाल, नीले व हरे फार्म किसानों से तो भरवा लिए लेकिन 20 लाख किसान ऐसे हैं जिनका कर्जा लटका पड़ा है। स्वयं कमलनाथ ने भिंड की सभा में यह स्वीकार किया है कि प्रदेश में अभी तक चिंहित 35 लाख किसानों में से 19 लाख किसानों का कर्जा माफ हो गया है। शेष 16 लाख किसानों के कर्जा माफी की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया कब तक चलेगी और यह कब पूरी होगी इसकी समय सीमा सरकार नहीं बता पा रही है।
वोट बैंक के लिए राजनीतिक दल किसानों को बना रहे मूर्ख
मप्र में किसानों से कर्ज माफी का वादा कर विधानसभा चुनाव तो कांग्रेस जीत गई लेकिन अब किसान कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछ रहे हैं कि आपने अपने चुनावी सभाओं में कहा था कि दस दिन में सरकार किसानों का कर्जा माफ कर देगी लेकिन अब तो नौ महीने हो गए। किसान वर्ग पूछ रहा है कि कांग्रेस के यह दस दिन कब पूरे होंगे। वहीं दूसरी ओर विधानसभा चुनावों में किसानों के आक्रोश का शिकार हुई भाजपा इस समय मौका भुनाने में जुटी है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों में जाकर किसानों के मुद्दे को उठा रहे हैं। शिवराज ने कमलनाथ सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने 21 सितंबर तक फसलों का सर्वे कर मुआवजा राशि नहीं बांटी तो 22 सितंबर को 1 घंटे के लिए वो किसानों के साथ सड़कों पर उतरेंगे। वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने तो विधानसभा का सत्र बुलाने तक की मांग कर डाली है। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत किसानों के नाम पर गर्म है लेकिन किसानों को राहत कब तक मिलेगी इस बारे में दोनों ही दलों के नेता केवल बातें कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर काम नहीं। वोट बैंक को लेकर चल रहे इस राजनीतिक घमासान के बीच परेशान केवल किसान ही हो रहा है।
