May 1, 2026

अंतिम सांस तक साथ रही माँ, लहरें भी न छुड़ा सकीं माँ का आँचल। बरगी बांध हादसा।

Xpose Today News
वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण श्रीवास्तव
मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुए हादसे से के बाद गहराई से 15 घंटों के लंबे इंतज़ार के बाद जब एक नाव बाहर निकली, तो समय जैसे वहीं ठिठक गया। मौत की उस खामोश कोठरी (नाव) के भीतर का मंजर देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं और गला रुंध गया। जब दुनिया की तमाम कोशिशें और उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं, तब पानी के भीतर एक माँ अपनी ममता की ढाल लिए खड़ी थी। माँ अपने बच्चे को सीने से लगा कर रखी थी जैसे वह उसे सुरक्षा दे रही है और बच्चा दुनिया के सबसे सुरक्षित स्थान माँ के आँचल में सीने से लगा हुआ था।

“मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम करीब 5 बजे पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं। 28 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन के मुताबिक 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त क्रूज में लगभग 43 से 47 पर्यटक सवार थे। टिकट सिर्फ 29 लोगों की कटी थी।”

“हादसा किनारे से करीब 300 मीटर दूर हुआ। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया कि शुरुआती रेस्क्यू में SDRF ने कई लोगों को बचाया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू जारी है।”

विपरीत परिस्थितियों में अडिग प्रेम
कहते हैं कि जब इंसान मौत को सामने देखता है, तो वह सबसे पहले अपनी जान बचाने की सोचता है। लेकिन एक माँ का व्याकरण दुनिया के स्वार्थ से अलग होता है। वह तस्वीर इस बात की गवाह है कि जब नाव पलट रही होगी, जब चारों ओर चीख-पुकार और अंधेरा छाया होगा, उस डरावने पल में भी उस माँ ने अपनी जान बचाने के बजाय अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाए रखा।

नदियाँ हार गईं, माँ जीत गई
आज भले ही काल के क्रूर प्रहार ने माँ और बेटे को हमसे छीन लिया हो, लेकिन यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि माँ की ‘क्षमता’ और उसके ‘त्याग’ का कोई मोल नहीं है। वह चाहती तो शायद अपनी जान बचाने की कोशिश कर सकती थी, लेकिन उसने अपने बच्चे को अकेला छोड़ना स्वीकार नहीं किया। वह मरते दम तक उसे अपनी बाहों के सुरक्षा घेरे में थामे रही।

यह घटना हमें झकझोरती है और याद दिलाती है कि इस सृष्टि में ‘माँ’ शब्द से बड़ा कोई सुरक्षा कवच नहीं है। लहरें शरीर को तो डुबो सकती हैं, लेकिन उस अटूट बंधन को नहीं तोड़ सकीं जो एक माँ ने अपनी अंतिम सांस तक निभाए रखा।

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Written by Xpose Today News

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