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एकेडमी ऑफ़ डायबिटिक एंड कार्डिओ रिनल (डीसीआर) मेडिसिन लंदन द्वारा मुंबई में आयोजित डीसीआर फोरम के शैक्षणिक सम्मेलन में
“रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ़ डायबीटीज़ इन इंडिया” (भारत की सबसे बड़ी डायबिटीज़ विशेषज्ञों की संस्था) के म प्र राज्य सचिव एवं
डायबिटीज़, मोटापा, थायराइड एवं हॉर्मोन विशेषज्ञ डॉ राजेश अग्रवाल को प्रतिष्ठित “लियोनेल ओपाई” (Lionel Opie”) रिसर्च फेलोशिप लंदन के प्रो स्टीफ़नो परातो, प्रो रूरी हॉलमैन द्वारा प्रदान की गई. इंदौर से वे अकेले चिकित्सक है जिन्हें ये फैलोशिप प्रदान की गई है.
यह फेलोशिप चुनिंदा चिकित्सकों को उनके ऐकडमिक और रिसर्च पब्लिकेशन के आधार पर प्रदान की जाती है .
ज्ञातव्य है कि डॉ राजेश अग्रवाल के कई रिसर्च पेपर “प्री डाइबिटीज” “आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस”
” क्लिनिशियंस हेल्थ” “जेल सिंड्रोम ” “थाइरोट्रोपिन कंट्रोवर्सी ” “ऐकडेमिक ओवरडोज़ ” जैसे विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके है.
उनकी किताब “जिओ डायबिटीज” के ८ संस्करण प्रकाशित हो चुके है जिसमें वैज्ञानिक जटिलताओं को आसान हिंदी में समझाया गया है.
डॉ राजेश अग्रवाल कई राष्ट्रीय सम्मेलनों में वैज्ञानिक सत्रों को
संबोधित कर चुके है और उन्होंने मेडिकल इतिहास में पहली बार “जेल सिंड्रोम” को परिभाषित किया है.
डॉ राजेश अग्रवाल के अनुसार टाइप टू डाइबिटीज की रोकथाम संभव है और इसे राष्ट्रीय मिशन बनाना चाहिए क्योकि यह पारिवारिक एवं राष्ट्रीय उत्पादक क्षमता और स्वास्थ खर्च को बेहिसाब बढ़ा देता है.
डॉ राजेश अग्रवाल डाइबिटीज के प्रीमोर्डियल प्रिवेंशन पर भी एक पेपर लिख रहे है.
आरएसडीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनुज माहेश्वरी चेयरमेंन इलेक्ट डॉ सुनील गुप्ता राष्ट्रीय सचिव डॉ राकेश पारिख और प्रदेश अध्यक्ष डॉ सचिन गुप्ता डॉ सुबोध बांजल ने इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है.
