Xpose Today
कलाकार की नज़र पारखी होती है वह जब किसी निर्जीव वस्तु को भी हाथ में लेकर उसमें अपना हुनर उकेरता है तो वह वस्तु जीवंत होकर बोलने लगती है।
ऐसी ही इंदौर की कलाकर प्रकृति जोशी है। भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाने और सहेजने का काम कर रही हैं। वे जब चिकनी मिट्टी (क्ले) से किसी प्रतिकृति का निर्माण करती हैं तो वह जीवंत हो जाती है। जब शीशे का उपयोग कर कोई कृति बनाती है तो वह शीशे की तरह पारदर्शी हो जाता है लगता है जैसे वह अपनी ख़ूबी खुद बयां कर रहा है।
प्रकृति जोशी, बेहद संजीदा और कलात्मक विरासत से प्रेरित एक भावुक कलाकार हैं। वे ‘कलाकृति’ के माध्यम से, पारंपरिक कला रूपों को आधुनिकता के स्पर्श के साथ पुनर्जीवित करने का प्रयास करती है।
हर रचना को धैर्य, सटीकता और प्यार से वे बनाती हैं।
यह जुनून है।
वे जो बनाती हैं उसमें वे अपनी आत्मा को अभिव्यक्त करती हैं। वे बताती कैं हर पैटर्न एक कहानी कहता है।आपकी कहानी ‘कलाकृति’ से शुरू हो।परंपरा से प्रेरित, जुनून के साथ गढ़ी गई और प्रेरणा देने के लिए बनाई गई कालातीत कला का सृजन है।
प्रकृति मंडला कला (Mandala Art) से जुड़ी है। मीनाकारी कला (Meenakari Art)
मीनाकारी राजस्थान की एक जीवंत और जटिल कला रूप है जो अपने समृद्ध रंगों और शाही भव्यता के लिए जानी जाती है। परंपरा में रसी हुई, यह बेहतरीन शिल्प कौशल और कालातीत सांस्कृतिक सुंदरता को दर्शाती है।
लिप्पन कला (Lippan Art)
लिप्पन कला गुजरात के कच्छ से आती है। चिकनी मिट्टी (क्ले), प्राकृतिक मिट्टी और शीशे के काम का उपयोग करते हुए, यह सुंदर बनावट और परावर्तक आकर्षण पैदा करती है, जो जीवन में देहाती सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत लाती है।
वे बताती है मंडला कला सामंजस्य, संतुलन और सचेतनता (mindfulness) का प्रतीक है. केंद्र से बाहर की ओर फैलते हुए जटिल पैटर्न के साथ बनाई गई, प्रत्येक मंडला किसी भी स्थान पर शांति, सकारात्मकता और कालातीत सुंदरता का स्पर्श लाती है.
यह परंपरा से प्रेरित, प्यार से गढ़ी गई, लंबे समय तक चलने के लिए बनाई गई हैं।
















