Xpose Today
लेखिका रेखा जाट
फीनिक्स इंस्टीट्यूट, वडोदरा में
सीनियर केमिस्ट्री फ़ैकल्टी हैं।
लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, स्मार्टफोन पर स्क्रॉल करना कई लोगों की आदत बन गया है। हालांकि, इसने संचार को बेहद आसान और त्वरित बना दिया है, लेकिन इसका एक स्याह पहलू भी है, जो विशेष रूप से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित कर रहा है।
1. ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ (FOMO) का बढ़ता दायरा
सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफस्टाइल, छुट्टियों की तस्वीरें और सफलता के अपडेट देखकर युवाओं में ‘FOMO’ (Fear of Missing Out) यानी कुछ छूट जाने का डर पैदा हो रहा है। इसके कारण युवाओं में लगातार यह भावना घर कर जाती है कि वे दूसरों की तुलना में पीछे छूट रहे हैं, जिससे उनमें चिंता (Anxiety) और तनाव बढ़ता है।
2. आभासी दुनिया और तुलना की संस्कृति
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अक्सर लोग अपनी जिंदगी के बेहतरीन पलों को ही साझा करते हैं। इस ‘परफेक्ट लाइफ’ को देखकर कई युवा अनजाने में अपनी वास्तविक जिंदगी की तुलना इस आभासी (Virtual) दुनिया से करने लगते हैं। इसका सीधा असर उनके आत्मविश्वास और ‘सेल्फ-इस्टीम’ (Self-esteem) पर पड़ता है, जो कई बार अवसाद (Depression) का कारण बनता है।
3. साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गुमनामी का फायदा उठाकर दूसरों को नीचा दिखाना या ट्रोल करना आसान हो गया है। साइबर बुलिंग का शिकार होने वाले युवाओं में अकेलापन, असुरक्षा की भावना और मानसिक तनाव अत्यधिक बढ़ जाता है, जो उनके समग्र विकास को प्रभावित करता है।
4. नींद की कमी और शारीरिक प्रभाव
देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताने से शरीर का ‘मेलाटोनिन’ (Melatonin) हार्मोन चक्र प्रभावित होता है, जिससे अनिद्रा (Insomnia) की समस्या पैदा होती है। पर्याप्त नींद न मिलने से चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मूड स्विंग्स की शिकायतें आम होती जा रही हैं।
डिजिटल वेलनेस: समाधान की ओर कदम
सोशल मीडिया को पूरी तरह त्यागना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन इसके संतुलित उपयोग (Digital Minimalists) से मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है:
स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: प्रतिदिन सोशल मीडिया उपयोग की एक सीमा तय करें और इन-बिल्ट ऐप लिमिटर का उपयोग करें।
डिजिटल डिटॉक्स: सप्ताह में कम से कम एक दिन या दिन के कुछ घंटे डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाएं।
वास्तविक रिश्तों को प्राथमिकता: स्क्रीन के बाहर की दुनिया में परिवार, दोस्तों और अपनी रुचियों को समय दें।
सकारात्मक कंटेंट चुनें: ऐसे अकाउंट्स को अनफॉलो करें जो आपके मन में नकारात्मकता या हीनभावना पैदा करते हैं।
निष्कर्ष: सोशल मीडिया एक सशक्त साधन है, बशर्ते इसका नियंत्रण हमारे हाथ में हो, न कि इसका नियंत्रण हम पर। युवाओं को डिजिटल जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग होना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
