देवास। देशभर में दशहरे के पर्व पर रावण दहन के साथ ही दशहरा मिलन होता है। देवास में दशहरा मिलन पर गिलकी के भजिए खाकर एक दूसरे को दशहरे की बधाई दी। इसके लिए पांच क्विंटल से अधिक भजिए बनाए गए। भजिया खाने के लिए पांच से भी ज्यादा गाँवों के लोग पहुंचें। देर रात्रि तक भजिया खाने और खिलाने का कार्यक्रम चलता रहा।
दरअसल देवास के चापड़ा में पिछले नौ सालों से भजिया उत्सव मनाया जा रहा है। उत्सव का आयोजन करने वाली नव दुर्गा समिति के अध्यक्ष रामेश्वर बताते हैं कि अंबे माता मंदिर परिसर में पूरे नगर का दशहरा मिलन समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बच्चियों ने गरबे की प्रस्तुति दी। इस दौरान पांच क्विंटल से अधिक भजिए बनाए गए। भजिया उत्सव में नगर चापड़ा के साथ साथ आसपास के पांच से अधिक गाँवों के लोग भजिया खाने पहुंचे। भजिया उत्सव के लिए ग्रामीणों ने स्वेच्छा से दान दिया। महिलाओं ने बेसन, गिलकी जैसी चीजें दान में दी। भजिया उत्सव में 160 किलो प्याज, 130 किलो गिलकी, 55 किलो हरी मिर्च, 160 किलो बेसन के साथ ही अन्य सामग्री का उपयोग किया गया। भजिया बनाने के लिए आठ लोग दोपहर 2 बजे से लेकर रात्रि एक बजे तक लगे रहे।
पुलिस सुरक्षा में शुरू हुई थी शुरुआत
दरअसल में पहले आए दिन झगड़े होते थे। इस कारण यहाँ के लोगों ने त्यौहार मनाना ही बंद कर दिया था। कभी यहाँ दशहरा मिलन भी जोर शोर से मनाया जाता था परंतु झगड़े के चलते यह परंपरा भी धीरे-धीरे बंद होने लगी थी। 10 साल पहले दशहरे के दिन भी दो गुट में आपसी झगड़े के चलते चलते लोगों ने घर से निकलना बंद कर दिया।
नौ साल पहले अंबे माता मंदिर समिति ने दशहरा मिलन का आयोजन रखने के निश्चय किया। तत्कालीन थाना प्रभारी ने भी इसका समर्थन करते हुए नगर के वासियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली। जब दशहरा मिलन और भजिया उत्सव की तैयारियां की गई तो ग्रामीणों ने दिल खोलकर दान दिया। महिलाओं ने भी उत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। दशहरे के दिन पूरा नगर माता जी मंदिर के परिसर में एकत्रित हुआ। तब से यह उत्सव आज तक चला आ रहा हैं।
