May 15, 2026

पानी का पहचाना मोल, सवा सौ साल पुराने बाँध में रोका पानी

बागली। बीते सालों में भीषण जल संकट का सामना कर चुके बागली के लोगों ने अब पानी के मोल को पहचान लिया है। उन्होंने क़स्बे के नज़दीक बहने वाली कालीसिंध नदी का गर्मियों में गहरीकरण कर गाद हटाई और अब बारिश के बाद 113 साल पुराने बाँध में 22 गेट लगाकर पानी को सहेज लिया है। इससे क़स्बे का जल स्तर बढ़ेगा और जल स्रोतों में भरपूर पानी रहेगा।

कालीसिंध नदी के खनन व गाद सफाई कार्य के बाद नगर परिषद ने अब प्राचीन रणजीत बंध पर गेट लगाकर जल संग्रहण किया है। यह बांध लगभग सवा सौ साल पहले बागली रियासत के राजा ने कस्बे के लिए पानी रोकने के उद्देश्य से बनवाया था लेकिन बीते पचास सालों से यह अनुपयोगी हो चुका था। इसमें इतनी गाद भर गई थी कि नदी बारिश के बाद ही सूख जाया करती थी। अब इसमें लबालब पानी भरा है और अप्रैल तक भरे रहने की संभावना है। समूचे बंध को कवर करने के लिए 22 गेट लगे जिसमें 4.50 लाख से अधिक की लागत आई। इसके पूर्व राष्ट्रगान आयोजन समिति ने कार्तिक शुक्ल माह की चतुर्दशी पर चुनरी यात्रा निकाल कर पूजन-अर्चन भी किया था। बहरहाल खनन से लेकर गेट लगने नप व जनभागीदारी सहयोग से किया गया सम्पूर्ण कार्य चर्चा का केंद्र रहा और इसने बहती नदी पर आगे बसे गाँवों के लोगों को भी प्रेरित किया।

कौन कहता है तस्वीर नहीं बदली जा सकती

इसकी शुरुआती नींव अलसुबह उत्कृष्ट विद्यालय के मैदान में क्रिकेट व फुटबॉल खेलने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस खेल संगठन के छह युवाओं गगन शिवहरे, आशीष सिसौदिया, दीपक शर्मा, संतोष शर्मा, चंदन नटेरिया व प्रतापसिंह डाबी ने रखी थी। कुछ दिनों तक सभी असमंजस्य में रहे कि नगर में ऐसा क्या करना चाहिए जिससे कि सभी को लाभ प्राप्त हो। किसी के मन मे कालीसिंध नदी की सफाई का विचार आया और श्रमदान करने के लिए तत्काल योजना बनी और कमर भी कस ली गई।

23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर कालीसिंध माताजी के अमोदिया स्थित उद्गम स्थल से प्रतिदिन 2 घंटे श्रमदान का कार्य शुरू हुआ। सोशल मीडिया पर प्रचार हुआ और इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिला। यह कार्य खत्म हुआ तो अब नदी में गाद सफाई के लिए खनन की योजना बनने लगी। लेकिन आम चुनावों की आचार संहिता आड़े गई।

गहरीकरण में मिला था लोगों का व्यापक समर्थन

मई माह में हुए नदी गहरीकरण में स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़ कर सहयोग किया था। प्रबंध समिति ने 100 रुपए प्रति ट्रेक्टर मिट्टी का न्यूनतम शुल्क रखा। जिसमें से 50 रुपए प्रति ट्रेक्टर जेसीबी की फीस थी। लोगों ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। महिला शक्ति संगठन ने नगर से अंशदान के रूप में 51051/- की राशि एकत्र की।खनन में 2100 ट्राली गाद निकाली गई। खनन शुल्क व जनसहयोग से डेढ़ लाख से अधिक की राशि एकत्र हुई।

2 करोड़ 80 लाख लीटर पानी संग्रहित होगा

गेट लगाने के लिए हुई बैठक में नप अध्यक्ष अमोल राठौर ने यह कार्य नगर परिषद की और से करने की घोषणा की। नप अध्यक्ष राठौर व सीएमओ मुकेश चौबे ने बताया कि बंध के बैराजों में 6 फुट ऊंचाई के 22 गेट लगाए गए है। जिसकी लागत 4.50 लाख से अधिक है। अब नदी के तल में 2करोड़ 80लाख लीटर पानी संग्रहित होगा।

चुनरी निकालकर किया भूमिपूजन

राष्ट्रगान आयोजन समिति के आह्वान पर नगरजनों ने कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी पर चुनरी यात्रा निकाली। यह मुख्यबजार से ढोल-ढमाकों के साथ रणजीत बंध पहुँची। पंडित सुनीलदत्त जोशी के आचार्यत्व में लकड़ी माताजी का वैदिक पूजन किया गया। कालीसिंध के जल में खड़े होकर पूजन कर चुनरी अर्पित कर और सदैव प्रवाहमान रहने की कामना की गई। रणजीत बंध के बैराज का पूजन कर मजबूती से जल संग्रहण की प्रार्थना की गई। इस अवसर पर नप अध्यक्ष राठौर, नप उपाध्यक्ष लक्ष्मी ग्रेवाल, सुरेंद्रसिंह उदावत, प्रवीण चौधरी, डॉ ऋतु शेखावत, डॉ रामचंद्र राठौर, श्यामा तोमर, देवेंद्र गोस्वामी, गगन शिवहरे, आशीष सिसौदिया, अली हुसैन बोहरा,देवेंद्र उपाध्याय, हेमेंद्र शिवहरे,नंदकिशोर मोहवाल, मदनकुंवर सेंगर, सुनीता उदावत, गीता चौधरी, संध्या शिवहरे, लालिमा जायसवाल, रजनी मोहवाल व गोपी शर्मा सहित नगरवासी उपस्थित थे।

Written by XT Correspondent

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