आगर-मालवा। आगर-मालवा में इन दिनों सिंघाड़े की खेती पूरे शबाब पर है। इस समय यहाँ सिंघाड़ा आता है। आगर-मालवा के सिंघाड़े को पूरे भारत पसंद किया जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों से खासतौर पर आगर-मालवा का सिंघाड़ा मंगवाया जाता है। आगर-मालवा का सिंघाड़ा मीठा होता है, बड़ा होता है और सस्ता भी होता है।
दरअसल आगर-मालवा में कुछ छोटे-छोटे तालाब हैं। इन तालाबों में सिंघाड़े की खेती की जाती है। सिंघाड़ा किसान जनवरी माह और फरवरी माह में पूरे तालाब में सिंघाडे की बोवनी कर देते हैं। इसके बाद पूरे 8 से 9 महीनों तक किसान सिंघाडों की देख रेख करते हैं। समय-समय पर तालाब में साफ़ सफाई करके सिंघाडों को कंजी आदि से बचाया जाता है। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर माह में इन्हें तोड़ा जाता है।
सिंघाड़ा को पहले तालाब से नाव के द्वारा निकाला जाता है। तालाब से सिंघाडों को निकालकर इन्हें नाव में एकत्रित करके किनारों पर लाकर इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद सिंघाडों को पानी में उबाला जाता है। पानी में उबाल के समय काला रंग भी प्रयोग किया जाता है। इस तरह से मीठे और लजीज सिंघाडे तैयार किए जाते हैं।
आगर-मालवा से सिंघाडे गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित भारत के कई राज्यों में मांग के अनुसार भेजा जाता है। वैसे तो सिंघाड़े की अन्य स्थानों पर भी होती है लेकिन आगर मालवा का सिंघाड़ा पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। सिंघाड़े की इतनी अच्छी उपज और इतना अच्छा स्वाद होने के कारण ही यह सिंघाड़ा देश भर में अपना स्थान बनाए हुए है।
