नरसिंहपुर। आमतौर पर दुकान पर बिकने वाली मिठाई या अन्य सामान का दाम दुकानदार तय करता है। लेकिन नरसिंहपुर में चल रहे मड़ई मेले में चीजों के दाम दुकानदार नहीं बल्कि गाँव के बुजुर्ग तय करते हैं। इसका मकसद यह है कि गरीब व्यक्ति को भी मीठा खाने को मिल सके। इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि दुकानदार को नुकसान न हो। दुकानदार भी इस मेले में कमाने के उद्देश्य से नहीं बल्कि आपसी रिश्तों में मिठास को बनाए रखने के लिए आए हैं। मड़ई मेले में प्राचीन भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है।
दुनिया का सबसे अनोखा मड़ई मेला नरसिंहपुर में पिछले 200 से भी ज्यादा वर्षों से लगता आ रहा है। हर साल छठ के दिन तीन दिनों के लिए मेला लगाया जाता है। इस वर्ष भी नरसिंहपुर में मड़ई मेला लगाया गया है, जिसका समापन सोमवार को होगा।
मड़ई मेला ग्वाल परंपरा से लेकर स्थानीय मिठाई के लिए बहुत ही लोकप्रिय है। क्षेत्र के लोग इस मेले का पूरे साल इन्तजार करते हैं। हर साल हजारों की संख्या में लोग मेले का लुफ्त उठाने के लिए पहुँचते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग मड़ई मेले का आनंद लेने के पहुंचे।
इस मेले की ख़ास बात यह है कि मेले में लगने वाली दुकानों के सामान का रेट इस गांव के पंच, मुखिया एवं उनके साथ ग्रामीण मिल बैठकर तय करते हैं। एक बार रेट तय होने के बाद फिर मेले में जमकर मिठाई पकवान की खरीदारी होती है। हालाँकि इस बात का ख़ास ध्यान रखा जाता है कि किसी को नुकसान ना पहुंचे। इस दाम को फिक्स करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस परंपरा का मकसद यह था कि व्यापारी को भी नुकसान ना हो और गरीब को भी मीठा खाने को मिल सके।
मड़ई मेला शुरू होने के पहले माता चंडी की पूजा की गई। इसमें भारी संख्या में लोग हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। इसमें ग्वालों ने मोर पंख की बनी हुई ऊँची – ऊँची ढाल लेकर नृत्य किया। मेले में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और जमकर मेले में खरीददारी भी करती देखी जा रही हैं।
मड़ई मेले में होने वाला अहीर नृत्य लोगों का मन मोह रहा है तो वहीँ रात में होने वाले रास रंग के कार्यक्रम भी मड़ई मेले की परंपरा में चार चांद लगा रहा हैं। मेले में आने वाली महिलाओं का कहना है कि यहां मिलने वाला सामान सस्ता होता है। यहाँ महिलाएं अपने श्रंगार का सामान ले रही हैं तो वहीँ पुरुष अपनी किसानी से संबंधित सामान की खरीदारी कर रहे हैं। मेले में मिलने वाली मिठाई सस्ती और स्थानीय स्तर की होती हैं जो लोगों को खूब भाती हैं।
वहीं स्थानीय विधायक का कहना है कि यह मड़ाई मेला सभी जाति एवं धर्म को एकरूपता प्रदान करता है। सभी लोग मिलजुलकर मेले में आनंद उठाते हैं। लोक नृत्य का आनंद लेते हैं और यही हमारी परंपरा और सभ्यता भी हैI सांस्कृतिक विरासत को समेटे मोहद ग्राम का यह पारंपरिक मेला बताता है। यही हमारी विरासत है।
