जबलपुर। प्रदूषण के कारण दिल्ली की हवाएं जहरीली हो गई है। लोगों को साँस लेने में दिक्कत हो रही है। दमघोंटू जहरीली हवा ने दिल्ली वासियों को भयभीत कर रखा है। आलम यह है कि दिल्ली में रहने वाले नौकरीपेशा लोग अब अपने बच्चों को दूसरे राज्यों में छोड़कर आने पर मजबूर हो गए है। माँ-बाप को मासूम बच्चों से दूर रहना तो मंजूर है, लेकिन बच्चो की जिंदगी से समझौता नहीं कर सकते।
ताज़ा मामला जबलपुर का है। जबलपुर के रहने वाले वैभव चौकसे सुप्रीम कोर्ट में वकील है और वह पिछले 7 सात सालों से दिल्ली में रह रहे हैं। इस बार दिल्ली में प्रदूषण इतना बढ़ गया कि उन्हें मजबूरन अपने मासूम बेटे समर और बेटी स्थिति को जबलपुर में रह रहे माता-पिता के पास छोड़ना पड़ा।
वैभव के पिता राजीव चौकसे बताते है कि, वैभव अपनी पत्नी रिमाली और बच्चों के साथ दिवाली मनाने जबलपुर आए थे। दिवाली के बाद दिल्ली से जो प्रदूषण की खबरें आई उससे कहीं ना कहीं सभी चिंता में पड़ गए। दिल्ली में हालात बद से बदतर होते जा रहे थे। इस कारण वैभव और रिमाली ने अपने ढाई साल के बच्चों को माता-पिता के पास ही छोड़ने का फैसला किया।
बच्चों की दादी का कहना है कि माता-पिता से दूर रह रहे बच्चों को रखने में परेशानी तो होती है। लेकिन बच्चों की भविष्य और स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला भी जरूरी है।
