May 10, 2026

हर दिन नमाज़ के साथ राम कथा और भागवत पाठ, 35 सालों से जारी सिलसिला

राजगढ़। जहाँ एक तरफ लोग धर्म के नाम पर एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। वहीँ प्रदेश का एक मुस्लिम शख्स ऐसा भी जो पिछले 35 सालों से रामायण का पाठ कर रहा है। यह शख्स अब तक देश के 300 से अधिक स्थानों पर रामकथा कर चुका हैं।

मध्यप्रदेश के राजगढ़ में रहने वाले इस शख्स का नाम है फारुख खान। लोग उन्हें ‘फारुख रामायणी’ के नाम से पुकारते हैं। फारुख भले ही रामायण का पाठ करते हो लेकिन वह कभी भी अपनी पांच बार की नमाज से नहीं चुकते है। शुरुआत में कुछ लोगों ने उनका विरोध भी किया था। लेकिन वह आम लोगों को धर्म का पाठ पढ़ाते रहते हैं। उन्हें सुनने के लिए हजारों की भीड़ आती है। वह हर दिन घंटों रामायण पाठ करते हैं। फारुख वेद, गीता समेत तमाम ग्रंथों पर धाराप्रवाह बोलते हैं। फारुख को राम कथा के लिए अब तक देश के बीस से अधिक राज्यों में बुलाया जा चुका है। आज उनके 30 से अधिक ब्राह्मण शिष्य है।

फारुख का जन्म नरसिंहगढ़ जिले के छोटे से गांव गुनियारी में अहमद खान के यहां हुआ था। मात्र छह साल की उम्र में ही फारुख का झुकाव रामायण और गीता जैसे धर्म ग्रंथों की तरफ बढ़ने लगा था। वे गाँव में होने वाली राम कथाओं में घंटों बैठे रहते थे।

गायत्री परिवार के किसी कार्यक्रम में गायत्री पीठ के संस्थापक सदस्य आचार्य श्री राम शर्मा ‘आचार्य’ का सम्मान देखकर ठान लिया कि जीवन में ऐसा ही कुछ बनना है। यहीं से उनके सफर की शुरुआत हुई जो अब तक जारी है। 24 साल की उम्र से रामकथा धार्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के चलते पूरे गांव में फारुख खान पहचाने जाने लगे थे। 1984 में पहली बार फारुख को सार्वजनिक मंच पर राम कथा करने का मौका मिला। सभी ने उनकी राम कथा की काफी सराहना की।

इसके बाद फारुख रामायणी ने एक के बाद एक कई छोटे-बड़े मंचों पर राम कथा कर खूब सराहना बटोरी। पहली रामकथा के करीब 10 सालों बाद 1994 में उनके गुरु पं। लक्ष्मीनारायण शर्मा ने फारुख खान के धर्म ग्रंथ के ज्ञान को देखते हुए उन्हें ‘रामायणी’ के खिताब से नवाजा और फारुख खान की जगह वे फारुख रामायणी कहलाने लगे।

Written by XT Correspondent

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