May 15, 2026

बदहाल स्वास्थ्य सुविधा- नसबंदी के बाद नसीब नहीं हुआ स्ट्रेचर, गोद में उठा ले गए परिजन

नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की हालत कितनी ख़राब है इसकी बानगी हाल ही में नरसिंहपुर में देखने को मिली। यहाँ के जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में महिलाओं की नसबंदी की गई। लेकिन ऑपरेशन के बाद महिलाओं को वार्ड में ले जाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। यहाँ महिलाओं को परिजन गोद में उठाकर वार्ड तक ले गए। दूसरी तरफ बेहोशी की हालत में महिला को पलंग भी नसीब नहीं हुआ। ऐसे में उन्हें जमीन पर ही सोने को मजबूर होना पड़ा। हैरान करने वाली बात यह है कि इन सब अनियमितताओं के बीच अस्पताल के सिविल सर्जन को यह ही नहीं पता है कि यहाँ महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन किया जा रहा है।

सरकार समय-समय पर जनसंख्या निवारण के लिए अस्पतालों में पुरुष और महिला नसबंदी शिविर लगाती है। इसके लिए भारी भरकम बजट का प्रबंध किया जाता है। हर मरीज के ऊपर हजारों रुपए खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके नरसिंहपुर जिला अस्पताल में नसबंदी शिविर की दुर्दशा मानो सरकार को मुंह चिढ़ा रही हो। इतनी भीषण ठंड में शीत लहर के चलते जहां लोग रजाई में दुबकने मजबूर है वहीँ यहाँ ऑपरेशन के बाद महिलाओं को फर्श पर लेटाया जा रहा है। कहीं एक पलंग पर दो-दो महिलाओं को लेटाया जा रहा है। स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराने के कारण महिलाओं को परिजन गोद में उठाकर वार्ड तक ले जा रहे हैं।

महिलाओं के परिजनों का कहना है कि हमें ना तो पलंग मिल पा रहे हैं और ना ही फर्श पर गद्दे। ऐसे में ऑपरेशन के बाद इंफेक्शन के चांस बढ़ जाते हैं और बाद में कई बार मौत तक हो जाती है।

वहीँ जब इस मामले को लेकर हमने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से बात की तो पहले उन्होंने इस बात से ही इंकार कर दिया कि यहाँ कोई टीटी ऑपरेशन हुए हैं और ना ही उन्हें इसकी जानकारी है। जब उन्हें जिला अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के बारे में बताया गया तो वह सफाई देते हुए नजर आए कि टीटी ऑपरेशन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर द्वारा कराए गए है। इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यह सारी व्यवस्थाएं उनको देखनी चाहिए पर यदि ऐसा हुआ है तो मैं देखूंगी।

अंधेर नगरी चौपट राजा की कहानी तो आपने सुनी होगी अब जिला अस्पताल के इन हालातों से आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस जिला अस्पताल का दो माह पहले प्रदेश के मुखिया कमलनाथ ने उद्घाटन किया हो वहां के ऐसे हालात है तो दूसरी जगहों का क्या होगा। अस्पताल के ऐसे हालात हैं कि अस्पताल के प्रभारी यानी सिविल सर्जन को ही बड़े पैमाने पर हुए नसबंदी ऑपरेशन की ही जानकारी नहीं है।

Written by XT Correspondent

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