झाबुआ। इस समय पूरे देश में मकर संक्रांति की धूम है। लोग 15 जनवरी को मनाई जाने वाली मकर संक्रांति की तैयारियों में लगे हैं। मकर संक्रांति मनाने की अलग-अलग क्षेत्रों या समाज में अलग-अलग परम्पराएँ है। महाराष्ट्रीयन समाज में अनूठे तरीके से मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस पर्व पर नवदम्पत्ति को काले कपड़ों के साथ तिल-गुड़ के बने गहने भी पहनाए जाते हैं। साथ ही पहली संतान की पहली संक्रांति पर उसे भी तिल-गुड़ के बने गहनों से सजाया जाता है।
दरअसल महाराष्ट्रीयन समाज में इस परम्परा का मतलब होता है नवदम्पत्ति और संतान का जीवन मधुर और मिठास से भरपूर हो। नवदंपत्ति और बच्चे पर सूर्य की दशा का प्रभाव न पड़े, इसलिए उन्हें काले कपड़े पहनाए जाते हैं। समाज में मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ के गहने बनाने की परम्परा सालों से चली आ रही है। दूल्हे के लिए अंगूठी, घड़ी और हार बनाया जाता है वहीँ दुल्हन के लिए सिर से लेकर पैरों तक आभूषण तैयार किए जाते हैं। आभूषणों को मजबूती देने के लिए उनमे तिल-गुड़ के साथ ठोस चीजों का भी प्रयोग किया जाता है।
इसके अलावा मकर संक्रांति पर समाज के प्रत्येक घर में चावल की खिचड़ी और तिल-गुड़ की रोटी भी बनाई जाती है। महिलाओं का हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम रखा जाता है। महिलाओं को उपहार दी जाते हैं। समाज के लोग एक दूसरे के घर जाकर मकर संक्रांति पर्व की बधाई देते हैं।
