बैतूल। प्रस्तावित डैम की जगह बैराज बनाने से कांग्रेसी नेता इतने नाराज हो गए कि वह किसानों के साथ अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गए। किसान और कांग्रेसी नेता कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। यहाँ तक कि अधिकारियों से बात करने के लिए भी किसान और कांग्रेसी नेता उठने को तैयार नहीं हुए। ऐसे में अधिकारियों को ही जमीन पर बैठकर उनसे बात करना पड़ी। किसानों की मांग थी कि बैराज नहीं बल्कि डैम ही बनाया जाए।
दरअसल पिछली सरकार के समय बैतूल में गढ़ा डैम बनाने को मंजूरी मिली थी। वर्तमान सरकार गढ़ा डैम की डिजाइन बदल कर उस जगह बैराज बनाना चाहती है। इस बात की जानकारी जैसे ही किसानों को चली वह भड़क गए। बैतूल जिले के करीब 40 गांवों के किसानों ने रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया। इस दौरान किसानों के समर्थन में कांग्रेसी नेता भी अपनी सरकार के खिलाफ खड़े हो गए। जमीन पर बैठे किसान उठने को तैयार नहीं थे ऐसे में मजबूरी में अधिकारियों को भी जमीन पर बैठकर बात करनी पड़ी।
किसानों के साथ पहुंचे कांग्रेस नेता इतने नाराज हो गए कि उन्होंने अधिकारियों को ही खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास फंड ही नहीं है तो डैम की डिजाइन बदलने पर जो फंड बढ़ेगा वो कहां से आएगा। नेता जी यही नही रूके उन्होने यहाँ तक कह दिया कि वे सहकारी बैंक के अध्यक्ष है और किसानों की कर्जमाफी की 50 हजार और 1 लाख की किश्त अभी तक आ रही है।
दरअसल किसानों की नाराजगी इस बात से है कि शिवराज सरकार के समय स्वीकृत हुए गढ़ा डैम की डिजाइन बदल कर कांग्रेस सरकार उस पर बैराज बनाना चाहती है। इससे नाराज किसान सड़क पर उतर गए। हालाँकि उनका साथ देने के लिए भाजपा तो आगे नहीं आई, लेकिन कांग्रेस नेता जरुर अपनी ही सरकार के विरोध में खड़े हो गए।
बता दे कि शिवराज सरकार के समय 307 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि से स्वीकृत हुए इस डैम से 8 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होना है। जबकि सिचाई विभाग का कहना है कि डैम की डिजाइन बदलने का निर्णय सरकार का है और इससे 8 हजार हेक्टेयर से ज्यादा यानी 33 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी। अब देखना है कि सरकार किसानों की मांग पूरी करती है या फिर डैम की जगह बैराज बनाती है। राजनैतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यह विरोध कांग्रेस की गुटबाजी का हिस्सा भी हो सकती है।
