भोपाल। पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार सरई के पत्तों से बने दोने-पत्तल को बढ़ावा देगी। इसके लिए सरकार दोने-पत्तल का उद्योग लगाने के लिए एक करोड़ रुपए का ऋण देगी। दोने-पत्तल बनाने का काम आदिवासी करेंगे। इससे एक तरफ पर्यावरण संरक्षण होगा वहीँ दूसरी तरफ आदिवासियों को रोजगार भी मिलेगा।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की अपील की है। इस समय प्लास्टिक से बने दोने-पत्तल का उपयोग किया जाता है। जिन्हें एक बार यूज करके फेंक दिया जाता है। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है। ऐसे में पर्यावरण को बचाने के लिए बाजार में प्लास्टिक की जगह सरई के पत्तों से बने दोने-पत्तल उतारे जाएँगे।
सरई के पत्तों से दोने-पत्तल बनाने के उद्योग उन क्षेत्रों में लगाए जाएँगे, जहाँ सरई के जंगल है। सरकार आदिवासियों को दोने-पत्तल बनाने का प्रशिक्षण भी देगी। इसके अलावा पत्तों की तुड़ाई का काम भी आदिवासी समितियों को ही सौंपा जाएगा। इससे आदिवासियों को काफी लाभ होगा। दोने-पत्तल रखने के लिए गोदाम बनाने के लिए भी सरकार अनुदान देगी। इसके अलावा वन विभाग आदिवासी समितियों को जमीन उपलब्ध करवाकर सरई के जंगल तैयार करवाएगा।
आदिवासियों द्वारा बनाए दोने-पत्तल को सहकारी समितियों के माध्यम से बाजार में उतारा जाएगा। बड़े-बड़े व्यापारियों से सम्पर्क कर दोने-पत्तल के आर्डर लिए जाएँगे। प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी दोने-पत्तल सप्लाई किए जाएँगे। बता दे कि प्रदेश के छिंदवाडा, सीधी, मंडला, शहडोल, सिंगरौली, होशंगाबाद और डिंडोरी जिलों में सरई के जंगल सबसे ज्यादा है।
