May 20, 2026

चार हजार 950 हेक्टेयर में 74 हजार 900 किसानों को अफीम के लाइसेंस

नीमच। हर साल की तरह इस बार भी साल 2019-20 के लिए अफीम उत्पादन के लाइसेंस जारी कर दिए हैं। केंद्रीय राजस्व विभाग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के चार हजार 950 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 74 हजार 900 किसानों को लाइसेंस जारी किया है। सबसे अधिक लाइसेंस मध्य प्रदेश के किसानों को जारी किए गए हैं, वहीँ उत्पादन हेतु आवंटित रकबा राजस्थान में सबसे ज्यादा है।

बता दे कि केंद्रीय राजस्व विभाग द्वारा केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के माध्यम से तीनों प्रदेशों के किसानों को अफीम उत्पादन हेतु निर्धारित क्षेत्र में लायसेंस देने की नीति घोषित की जाती है। अफीम से जीवन रक्षक औषधियों का निर्माण किया जाता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 74 हजार 900 किसानों को 5, 6, 10 तथा 12 आरी क्षेत्र में अफीम उत्पादन के लायसेंस जारी किए हैं।

74 हजार 900 किसानों में से मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 37 हजार 329 किसानों को लाइसेंस जारी किया गया है। इन किसानों को 2343.76 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है। इन किसानों में से 25 हजार 806 किसानों को 6-6 आरी, 7 हजार 344 किसानों को 5-5 आरी, 3 हजार 693 किसानों को 10-10 आरी तथा 485 किसानों को 12-12 आरी क्षेत्र के लिए लाइसेंस दिए गए हैं। इसके अलावा 17 आरी क्षेत्र का एक लायसेंस कृषि महाविद्यालय की देखरेख में प्रायोगिक उत्पादन से संबंद्ध है। बता दे कि मध्यप्रदेश में कुल आवंटित अफीम उत्पादन क्षेत्र का करीब 95 प्रतिशत भाग नीमच एवं मंदसौर जिले में आता है।

वहीँ राजस्थान में 33 हजार 589 किसानों को लाइसेंस जारी किया गया है। इन किसानों को 2378.63 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है। वहीँ उत्तरप्रदेश में लगभग 3982 किसानों को लाइसेंस जारी किया गया है। इन किसानों को 276.61 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष जितने किसानों को लायसेंस जारी किये जाते हैं, वह शत-प्रतिशत रूप से खेती नहीं कर पाते हैं। अनेकों किसान प्राकृतिक स्थितियों तथा अन्य तात्कालीन व्यवहारिक कठिनाईयों के प्रभाव स्वरूप खेती नहीं करते हैं अथवा बोई गई फसल को प्रक्रियानुसार उखाड़वा लेते हैं। इसीलिए अंतिम रूप से फसल वर्ष के लिए आवंटित रकबे से कम मात्रा में ही अफीम उत्पादन होता है। उक्त श्रेणी के किसानों को अगले वर्ष पुनः लायसेंस की पात्रता होती है। इस वर्ष कितने किसान इस श्रेणी में आएंगे, यह बाद में स्पष्ट हो पाएगा।

Written by XT Correspondent

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