छतरपुर। जिस माँ ने सड़क किनारे चाय-भजिया बेचकर अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और पाल पोसकर बड़ा किया। उन्ही बेटों ने अपनी पत्नियों के कहने पर माँ को घर से निकाल दिया। यही नहीं वृद्धाश्रम में रह रही माँ की मौत के बाद बेटों ने उसका अंतिम संस्कार करने से तक से मना कर दिया। इस पर वृद्धाश्रम वालों ने पूरे रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया।
दरअसल छतरपुर की रहने वाली 75 वर्षीय फूलवती चौरसिया अपने बेटों से अलग वृद्धाश्रम रह रही थी। पति की मौत के बाद उसे बहुओं ने घर से निकाल दिया था, जिसमें बेटों की भी मौन सहमती थी। करीब चार साल से फूलवती वृद्धाश्रम में रह रही थी। बीते दिन जब उसकी मृत्यु हुई तो आश्रम वालों ने परिवार को इसकी सूचना दी लेकिन कोई भी अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं हुआ। आख़िरकार वृद्धाश्रम वालों ने पूरे रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया।
फूलवती के चार बच्चे थे। वह बेयर हाउस के बाहर सड़क किनारे चाय-भजिया बेचती थी। उसके पति बेयर हाउस में चौकीदारी करते थे। जब फूलवती के पति की मौत हुई तो उसके पढ़े लिखे बेटे को रामखिलावन को वहां अनुकंपा नियुक्ति मिल गई। आज उसका मासिक वेतन 35000 रुपए है। फूलवती के एक बेटे की मृत्यु पहले ही हो चुकी है। वहीँ एक बेटा आवारा और शराबी है। फूलवती की एक बेटी है पूजा, जो अपने ससुराल में रहती है।
पूजा ने बताया कि माँ को मेरे भाई-भाभी ने घर से निकाल दिया था। वह 4-5 सालों से वृद्धाश्रम में रह रहीं थीं। मैं कभी कभार ससुराल से मिलने आ जाती थी। मेरी माँ बहुत दुःखी थी। उसके बेटे मरते दम तक उसे देखने नहीं आए। पिछले महीने भाई के बेटे की शादी थी उसमें भी उन्होंने माँ को नहीं बुलाया। तब मैं आई थी तब भी माँ बहुत रोई थी। आज जब माँ की मौत हो गई हैं तो उनके बेटे अंतिम संस्कार करने के लिए भी तैयार नहीं हुए। मेरे भाइयों को भाभियों ने धमकी दी है कि वह माँ को घर लेकर आए तो उनका मरा मुँह देखोगे और दो-दो लाशें घर से निकलेंगी।
वहीँ जब इस मामले को लेकर फूलवती के बड़े बेटे से बात की तो उन्होंने माँ का शव घर ले जाने और अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। रोते हुए बेटे ने बताया कि हम मौत के बाद भी अपनी माँ अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हम मजबूर हैं। हमारी पत्नी ने मना किया है।
वृद्धाश्रम के लोगों ने बताया कि वह हमारे यहां पिछले कई वर्षों से रह रहीं थीं। उनकी परवरिश हम सब कर रहे थे। मौत के बाद इस स्थिति में हम लोगों ने अंतिम संस्कार किया है। वैसे भी जिनका कोई नहीं होता उनका हम ही सब कुछ करते हैं। वह तो इनके बच्चे थे तो इन्हें सूचना दी कि अगर आप लोग अंतिम दर्शन और संस्कार करना चाहते हों तो करें तो इन्होंने मना कर दिया तो हम लोगों ने किया।
