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आधुनिक दौर में सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि प्रभावी मैनेजमेंट कौशल, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। यही संदेश भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर (आईआईएम) के निदेशक डॉ. प्रो. हिमांशु राय ने मालवांचल यूनिवर्सिटी, इंडेक्स समूह संस्थान में आयोजित विशेष व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने कहा कि आप आईआईएम में हो या किसी मेडिकल संस्थान में जीवन में सबसे पहले आपको समय की कीमत को समझना होगा।समय से कीमती चीज इस दुनिया में कुछ नहीं है। आपको यदि कोई बुलाया तो आपको केवल समय का ध्यान नहीं रखना बल्कि सही समय पर पहुंचना ही आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर सीखने की आदत विकसित करें
अपने प्रेरणादायी संबोधन में डॉ. हिमांशु राय ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय प्रबंधन, निर्णय लेने की क्षमता, टीम वर्क और नैतिक नेतृत्व जैसे गुण भी अत्यंत आवश्यक हैं। प्रबंधन केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का आधार बनता है। यदि विद्यार्थी अपने समय, लक्ष्य और संसाधनों का सही प्रबंधन करना सीख लें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में कहीं न कहीं पहुंचने के लिए पहले आपको मंजिल का पता होना बहुत जरूरी है। इसके लिए केवल एक प्रयत्न नहीं बल्कि कई प्रयत्न करना होंगे। आज हमारा विजन केवल साक्षरता है लेकिन साक्षरता दिशा विपरीत हो तो वह राक्षस बन जाती है। उन्होंने कहा कि आईआईएम इंदौर में कई लोग कई सपने देखकर प्रवेश जरूर करते है। मेरा मानना है कि जब तक आप ज्ञानवान नहीं बने तब तक आप यहां आना और जाना दोनों नहीं कर सकते है।
गलती को दूसरों पर थोपे तो यह हमारी सबसे बड़ी गलती होगी
उन्होंने कहा कि जीवन में तीन आर रीयूज,रीसाइकिल और रीड्यूज के साथ रिफ्यूज वाला चौथा आर भी जोड़ना चाहिए।कोई चीज आपके जीवन में आपको कोई चीज नापसंद है तो आप उसे छोड़ दे यह जरूरी है। डॅा.राय ने कहा कि जब मुझे महाकुंभ में संतों ने व्याख्यान के लिए बुलाया जिसका विषय अमृत और विष था। मैं थोड़ा सोच में पड़ गया और मेरा मानना है कि जो आप जीवन में एक हद तक अपना सकते है वह अमृत है। जिस चीज की आप अति करते है वही विष होता है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में सिंह की महिमा सबसे ज्यादा क्योकिं सिंह किसी भी लक्ष्य पर चार बार हमला करता है। इसमें वह जरूर सफल होता है। वह जब तक दौड़ता है जब तक वह सफल नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि पद से आपका आत्मसम्मान जीवंत है तो वह केवल आपके पद तक रहेगा। यदि आप बनाए हुए मार्ग पर चलेंगे तो शायद आपको आसानी होगी। वहीं यदि आप नया मार्ग बनाएंगे तो आपको कई मुश्किलों को पार करना होगा। डॅा.राय ने महाभारत का उदाहरण देकर समझाया कि अर्जुन ने कृष्ण से कहा कि मैं अपनो पर कैसे हमला करूं। तो कृष्ण ने कहा कि आप दिल में बसे भय को पहले खत्म करें और लक्ष्य केंद्रित करे। आज हमारे जीवन में भी इस मंत्र को अपनाना होगा। आईआईएम लखनऊ में अपने कार्यकाल का एक उदाहरण देकर डॅा.राय ने समझाया कि कई बार हम किसी गलत कागज पर साइन करते है और फिर हम यदि उस गलती को दूसरों पर थोपे तो यह हमारी सबसे बड़ी गलती होगी। उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार ऐसी स्थिति आती है जहां सब कुछ हमारे नियंत्रण में रहता है तो कभी यह अनियंत्रित होता है। ऐसे समय में संयम के साथ काम करना सबसे पहली प्राथमिकता होती है।
कार्यक्रम के दौरान मयंक वेलफेयर फाउंडेशन के चेयरमैन सुरेशसिंह भदौरिया, वाइस चेयरमैन मयंकराज सिंह भदौरिया एवं मालवांचल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. संजीव नारंग ने डॉ. हिमांशु राय का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर विशेष अतिथि डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा सहित विभिन्न गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद् एवं संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
