इंदौर। 10 साल की उम्र में गाँव में आया मूक बधिर युवक अब गाँव का सरपंच बनने जा रहा है। इस साल होने वाले सरपंच चुनाव में मूक बधिर युवक का सरपंच बनना तय है। छोटी उम्र में ही माता-पिता के गुजरने के बाद यह शख्स गाँव के ही एक परिवार के यहाँ मजदूरी करने लगा। आज वह मजदूरी करते-करते उस घर का पारिवारिक सदस्य बन गया है। मूक बधिर युवक के सरपंच बनने से उसको बेटे के रूप में रखने वाले परिवार के साथ गाँव के लोग भी काफी खुश हैं।
भगवान चाहे तो एक झटके में किसी को रंक से राजा बना देता है। इंदौर जिले की सबसे बड़ी जनपद पंचायत देपालपुर की नई नवेली ग्राम पंचायत डांसरी में रहने वाले मूक बधिर युवक लालू पर यह कहावत पूरी तरह फिट बैठती हैं। लालू इस साल होने वाले चुनाव में डांसरी गाँव का सरपंच बनने वाला है। दरअसल देपालपुर में पहले 100 ग्राम पंचायतें थी। बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां पर 17 नई ग्राम पंचायत और अस्तित्व में आ गई। इन नई ग्राम पंचायत में डांसरी भी एक है। अब 117 ग्राम पंचायत में जो आरक्षण हुआ तो डांसरी पंचायत आदिवासी के लिए आरक्षित हुई। लालू इस गाँव में रहने वाला एकलौता आदिवासी हैं। ग्राम में लालू के अलावा कोई भी आदिवासी मतदाता नहीं होने से अब लालू ही सरपंच बनेगा। आदिवासी परिवार में जन्मे लालू का नाम 2011 की जनगणना में दर्ज किया गया था।
लालू बोल नहीं सकता लेकिन थोड़ा सुन और लिख सकता है। लालू 10 साल की उम्र में गाँव में आया था। माता-पिता के गुजरने के बाद वह गाँव के ही किसान शालिग्राम सोनगरा के यहाँ रहकर मजदूरी करने लगा। धीरे-धीरे वह सोनगरा परिवार का सदस्य बन गया। वह खेती के साथ-साथ पशुओं को चराने, नहलाने, दूध देना, एटीएम से पैसे निकालना जैसे काम भी करता है। शालिग्राम सोनगरा उसे अपना तीसरा बेटा मानते हैं। पिछले दिनों सरकार द्वारा किसानों के लिए लॉटरी डाली गई थी उसमें भी लालू विजेता बना। इस पर लालू को ट्रेक्टर मिला था।
जब ग्राम पंचायत डांसरी आदिवासी के लिए आरक्षित हुई तो सोनगरा परिवार ख़ुशी से भर गया। जब लालू से सरपंच बन जाने की बात की तो वह इशारों इशारों में बहुत कुछ बोल गया। वही इस परिवार की महिला मालकिन लालू को लाडले बेटे के रूप में मानती तो है। जब उन्हें मालूम पड़ा कि लालू अब गांव का सरपंच होगा तो वह फुले नही समाई।
