भोपाल। आख़िरकार विवाद बढ़ता देख राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी मिशन संचालक ने नसबंदी को लेकर जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को हर महीने 5 से 10 पुरुषों की नसबंदी कराने के आदेश का जमकर विरोध हो रहा था। विरोध को देखते हुए आदेश को निरस्त कर दिया गया है।
दरअसल सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को हर महीने 5 से 10 पुरुषों की नसबंदी कराने का आदेश दिया है। साथ ही लक्ष्य पूरा न करने पर ’नो पे, नो वर्क’ के आधार पर वेतन ना देने और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फरमान सुनाया है।
सरकार के इस फैसले का स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया था। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम जिले में घर-घर जाकर अभियान तो चला सकते हैं, लेकिन किसी का जबर्दस्ती नसबंदी ऑपरेशन नहीं कर सकते है।
वहीँ भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला किया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया कि, “मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है। क्या ये कांग्रेस का इमर्जेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है।“
